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Friday, September 25, 2020

हमारी बेटी

 



 

बिटिया जन्मी

सुरभित आँगन

खिली कलियाँ


 हुआ उजाला

घटा जीवन तम

छाई खुशियाँ !

 

 कथा पुरानी

है आँचल में दूध

आँखों में पानी

 

साक्षात दुर्गा

पधारी हैं घर में

माता हर्षानी !

 

 सिंधु सा मन

पर्वत सा हौसला

फूल सा तन

 

बाँध लिया है

सारा जहां बाहों में

पूरा गगन !

 

 शिक्षित कन्या

प्रतिभाशाली बेटी

सुयोग्य बहू

 

 पिता का मान

ससुराल की शान

क्या क्या न कहूँ  !


आज की बेटी

प्रवाहमान नदी

चंचल हवा  

 

गुणों की खान

समस्या का निदान

मर्ज़ की दवा !

  

प्रखर सूर्य

तो स्निग्ध चन्द्रमा है

शीतल बेटी

 

है ज्वालामुखी

उगलती है लावा

जुझारू बेटी !

 

 मरोड़ती है

रूढ़ियों की उँगली

आज की बेटी


 कर्म का पथ

तोड़ती वर्जनायें

साहसी बेटी !

 

 गढ़ती तन

शुद्ध करती आत्मा

देती संस्कार

 

नयी पीढ़ी को

करती है तैयार

दे सुविचार !

 

 घर की शान

परिवार का मान

शिक्षित बेटी

 

हीरे की कनी

आँगन का उजाला

हमारी बेटी !

 

एक छलाँग

नाप लिये बेटी ने

धरा गगन

 

नन्ही कली ने

बाँध लिये बाहों में

सातों गगन !

 

 साधना वैद

 

8 comments :

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (२६-०९-२०२०) को 'पिछले पन्ने की औरतें '(चर्चा अंक-३८३६) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

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    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद अनीता जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  2. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  3. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद महोदय ! बहुत बहुत आभार आपका !

      Delete
  4. आज की बेटी
    प्रवाहमान नदी
    चंचल हवा
    गुणों की खान
    समस्या का निदान
    मर्ज़ की दवा !...

    आज की क्षमतावान बेटियों का साकार चित्रण करती इस रचना के लिए आपको साधुवाद!!!

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  5. आहा ! हृदय से स्वागत है आपका शरद जी ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार !

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