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Friday, December 11, 2020

जग की रीत -- कुछ दुमदार दोहे

 


एक दुम वाले दोहे 


बहती जलधारा कभी, चढ़ती नहीं पहाड़ 

एक चना अदना कहीं, नहीं फोड़ता भाड़ !

व्यर्थ मत पड़ चक्कर में ! 


चूर हुआ शीशा कभी, जुड़ता नहीं जनाब 

मोती गिरता आँख से, खोकर अपनी आब !

कौन इसको चमकाए !  


'राज' करेंगे जो दिया, 'राजनीति' का नाम 

'दासनीति' कहिये इसे, और करायें काम ! 

नाम की महिमा भारी ! 


वाणी में विद्रूप हो, शब्दों में उपहास 

घायल कर दे बात जो, यह कैसा परिहास !

कभी मत करो ठिठोली !


तुकांत दुम वाले दोहे 


उगते सूरज को सभी, झुक-झुक करें सलाम 

जीवन संध्या में हुआ, यश का भी अवसान ! 

सुनो क्या खूब कही है, 

जगत की रीत यही है ! 


अंधा बाँटे रेवड़ी, फिर-फिर खुद को देय

जनता को भूखा रखें, 'नेता' का यह ध्येय !

मतलबी बड़े ‘सयाने’  

घाघ ये बड़े पुराने !


नेता सारे एक से, किसकी खोलें पोल 

अपनी ढकने के लिये, बजा रहे हैं ढोल ! 

चले जग को समझाने,

कोई न इनकी माने !


बाप न मारी मेंढकी, बेटा तीरंदाज़ 

नेताजी के पूत का, नया-नया अंदाज़ ! 

कौन इसको समझाये, 

कहे सो मुँह की खाये ! 


भर जाते हैं ज़ख्म वो, देती जो तलवार 

रहते आजीवन हरे, व्यंगबाण के वार ! 

ज़हर मत मन में घोलो 

कभी तो मीठा बोलो !  


जीवन जीने के लिये, ले लें यह संकल्प 

सच्ची मिहनत का यहाँ, कोई नहीं विकल्प ! 

उठा सूरज काँधे पर, 

चाँद तारे ला भू पर ! 


साधना वैद 


20 comments :

  1. यथार्थपरक, सुंदर दोहे..।मनोहारी अभिव्यक्ति..।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जिज्ञासा जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  2. दोहे तो दोहे, दुम भी बेमिसाल

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    1. स्वागत है प्रतुल जी ! बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार आपका !

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  3. दोहे तो दोहे, दुम भी बेमिसाल

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  4. दोहे तो दोहे, दुम भी बेमिसाल

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  5. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना आज शनिवार 12 दिसंबर 2020 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप सादर आमंत्रित हैं आइएगा....धन्यवाद! ,

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    1. आपका ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार श्वेता जी ! सप्रेम वन्दे !

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (13-12-2020) को   "मैंने प्यार किया है"   (चर्चा अंक- 3914)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    Replies
    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (13-12-2020) को   "मैंने प्यार किया है"   (चर्चा अंक- 3914)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद शास्त्री जी !

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  8. Replies
    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शांतनु जी ! स्वागत है !

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  9. सुप्रभात
    बहुत सुदर सृजन|मैंने तो पहली बार ही पढ़े हैं दुमदार दोहे |

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    1. यह भी एक विधा है सृजन की ! आधुनिक कवियों में हुल्लड़ मुरादाबादी का नाम मशहूर है दुमदार दोहों को लिखने में ! हार्दिक धन्यवाद जीजी ! बहुत बहुत आभार !

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  10. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  11. दमदार दुमदार दोहे! बहुत खुब!

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