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Wednesday, May 12, 2021

कैसे लिखूँँ चिट्ठी तुम्हें ....




आज फिर तुम्हें ख़त लिखने बैठी हूँ

आज फिर अतीत की वीथियों में भटक रही हूँ

पहले लिखते थे ख़त कलम से

स्याही पेन में भर के तैयार रखते थे

जो खत का मजमून लंबा होता !

बीच में स्याही समाप्त हो जाए

तो यह व्यवधान कितना अखरता था !

कलम की निब को भी घिस कर

अपने अनुकूल बना लेते थे !

पेन लीक कर जाते थे और

हाथों की उँगलियाँ स्याही से सन जाती थीं !

बड़े जतन करते कि पेन लीक ना करे

पेन के माउथ की चूड़ियों पर

धागा लपेटते कि पेन लीक न करे

पर निराशा ही हाथ लगती !

सीधे हाथ की तर्जनी और मध्यमा

सदैव स्याही से सनी ही रहतीं !

ना जाने कितने पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय

और कागज़ रंग डाले थे स्याही से

इस कलम के माध्यम से !

ख़त लिखते थे तो अपना दिल ही

उड़ेल कर रख देते थे ख़त में !

अब कहाँ है वो बात रिश्तों में !

ना ख़त ही लिखे जाते हैं

ना कलम की ही ज़रुरत बची

ना स्याही की ही दरकार रही !

अब तो फोन पर हाय हेलो में ही

रिश्ते सिमट कर रह गए हैं !

थोड़ी से अधिक अंतरंगता जतानी हो तो

वीडियो कॉल का सहारा ले लिया जाता है

फ्लाइंग किस उछाल दिये जाते हैं

कुछ मीठे मीठे संबोधनों से

संवादों को सजा दिया जाता है

लेकिन क्या फिर भी वह सब कुछ

कह दिया जाता है

जो एक दूसरे को देखे बिना

एक दूसरे से कुछ कहे बिना

उन लिफाफों में बंद चिट्ठियों में

शब्दबद्ध कर दिया जाता था ?

 

 

साधना वैद 

18 comments :

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 14-05-2021) को
    "आ चल के तुझे, मैं ले के चलूँ:"(चर्चा अंक-4060)
    पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित है.धन्यवाद

    "मीना भारद्वाज"

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    1. पुनश्च: कृपया चर्चा अंक-4065 पढ़े ।

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    2. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार मीना जी ! सप्रेम वन्दे !

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    3. जी ! सादर आभार !

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  2. उत्कृष्ट रचना

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    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  3. जी सही कहा... आज चिट्ठी लिखना तो मुमकिन नहीं लेकिन ईमेल काफी हद तक इस कमी को पूरा कर सकते हैं। सुन्दर रचना।

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    1. जी ! बिलकुल सही कहा आपने ! फिर भी चिट्ठी लिखने और पढ़ने में जो भावनात्मक रोमांच होता था वह बात ई मेल में नहीं आ सकती ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार !

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  4. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद शिवम् जी ! आपका बहुत बहुत आभार !

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  5. बिल्कुल सही कहा आपने। चिठ्ठीयों की खुश्बू...उसके मिजाज....भावनाओं में बह के वह सबकुछ लिख देना जो सामने कहना बहुत मुश्किल होता है....ये सब स्याही से लिखे चिठ्ठीयों से ही मुमकिन है।
    वाकई आपने बेहतर बातें लिखी हैं...शायद आपके इन भावनाओं से वे लोग फिर से लिखने लगे जो बिल्कुल इसे छोड़ चुके हैं। शुभकामना।

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    1. हार्दिक धन्यवाद प्रकाश जी ! आपको रचना अच्छी लगी मेरा श्रम सार्थक हुआ ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  6. बेहतरीन रचना

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    1. हार्दिक आभार अनुराधा जी ! दिल से शुक्रिया आपका !

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  7. आपने बहुत ही शानदार पोस्ट लिखी है. इस पोस्ट के लिए Ankit Badigar की तरफ से धन्यवाद.

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    1. हार्दिक धन्यवाद अंकित जी ! आपका बहुत बहुत आभार !

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  8. भुत भाव पूर्ण रचना |

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    1. हार्दिक धन्यवाद जीजी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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