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Sunday, May 9, 2021

रचना हूँ मैं तेरी माँ

 मातृ दिवस पर विशेष




रचना हूँ मैं तेरी माँ

मिट्टी से हूँ गढ़ी हुई
चौखट में हूँ जड़ी हुई
छाया हूँ मैं तेरी माँ !
रचना हूँ मैं तेरी माँ !

काँटों के संग उगी हुई
तीक्ष्ण धूप में पगी हुई
कलिका हूँ मैं तेरी माँ !
रचना हूँ मैं तेरी माँ !

युद्ध भूमि में डटी हुई
सुख सुविधा से कटी हुई
सेना हूँ मैं तेरी माँ !
रचना हूँ मैं तेरी माँ !

संघर्षों से दपी हुई
कुंदन जैसी तपी हुई
मूरत हूँ मैं तेरी माँ !
रचना हूँ मैं तेरी माँ !

अंतर्मन पर खुदी हुई
रोम रोम पर रची हुई
कविता हूँ मैं तेरी माँ !
रचना हूँ मैं तेरी माँ !

सात सुरों से सधी हुई
मीठी धुन में बँँधी हुई
विनती हूँ मैं तेरी माँ !
रचना हूँ मैं तेरी माँ !

हर पल मेरे पास है तू
हर पल मेरे साथ है तू
धड़कन है तू मेरी माँ !
रचना हूँ मैं तेरी माँ !


साधना वैद

18 comments :

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 10 मई 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार प्रिय सखी यशोदा जी ! सप्रेम वन्दे !

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  2. "...
    युद्ध भूमि में डटी हुई
    सुख सुविधा से कटी हुई
    सेना हूँ मैं तेरी माँ !
    रचना हूँ मैं तेरी माँ !
    ...""

    यह तो मैं अपने व्यवहार में रोज देखता हूं कि वो युद्ध में है और मैं उनका सेना जो डटकर उनका साथ दे रहा है। इन पंक्तियों को पढकर मेरे मुख पे एक छोटी मुस्कान थी।
    जी आपने बहुत ही बेहतरीन रचना रच दिया है...अन्य रचनाओं (माँ पर) से बिल्कुल भिन्न है।

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    1. हार्दिक धन्यवाद प्रकाश जी ! रचना आपको अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ ! आपका बहुत बहुत आभार !

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  3. माँ कहीं न कहीं बेटी के अंदर जीवित रहती है । सुंदर रचना ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद संगीता जी ! आपकी प्रतिक्रिया मन को आल्हादित कर जाती है ! दिल से बहुत बहुत आभार आपका !

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  4. बहुत सुंदर

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    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  5. मां बेटी के संबंधों पर बहुत खूब ल‍िखा साधना जी प्रणाम
    युद्ध भूमि में डटी हुई
    सुख सुविधा से कटी हुई
    सेना हूँ मैं तेरी माँ !
    रचना हूँ मैं तेरी माँ !

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    1. आपको रचना पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ ! हृदय से आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार अलखनंदा जी ! स्वागत है आपका इस ब्लॉग पर !

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  6. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज सोमवार (१० -०५ -२०२१) को 'फ़िक्र से भरी बेटियां माँ जैसी हो जाती हैं'(चर्चा अंक-४०६१) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार अनीता जी ! सप्रेम वन्दे !

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  7. बहुत खूबसूरत, मां ऐसी ही होती है

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    1. हृदय से स्वागत है आपका इस ब्लॉग पर भारती जी ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार !

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  8. बहुत सुंदर रचना

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    1. हार्दिक धन्यवाद अनुराधा जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  9. बहुत खूबसूरत रचना मैम

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    1. हार्दिक धन्यवाद प्रीति जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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