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Sunday, November 21, 2021

अनाड़ी

 



दुनिया गाती है गुण चतुर सयानों के

लेकिन हमको प्यार ‘अनाड़ी’ लोगों से,

दुनिया को छल बल की लीला है प्यारी

हमको प्यारे वो जो बरी इन रोगों से !

 

दुनिया घिरती हानि लाभ का सौदों में

मगर ‘अनाड़ी’ प्यार का सौदा करते हैं,

दुनिया छल से अपनी झोली है भरती

ये खुद लुट कर जान का सौदा करते हैं !

 

कहते लोग ‘अनाड़ी’ ऐसे बन्दों को

जिनको बस देना ही देना आता है,

करते जो दूजों का सारा माल हड़प

उन्हें ‘सयाना’ कहना जग को भाता है !

 

जग की ऐसी रीत नहीं हमको प्यारी

हमको निश्छल प्रेम सुहाना लगता है

नहीं चाहिये हमें ‘सयानों’ की दौलत  

हमें ‘अनाड़ी’ दोस्त खज़ाना लगता है !

 


चित्र - गूगल से साभार 

साधना वैद

6 comments :

  1. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद आपका !

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  2. सुप्रभात
    शानदार अभिव्यक्ति |

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    1. हार्दिक धन्यवाद जीजी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  3. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! बहुत बहुत आभार !

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