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Saturday, September 18, 2021

सुन लो न त्रिपुरारी

 


छन्न पकैया छन्न पकैया, मुश्किल है अब जीना

ग़म ही ग़म इनके जीवन में, पड़ता आँसू पीना  !

 

छन्न पकैया छन्न पकैया, बहती उलटी धारा

आसमान के नीचे इनका, कटता जीवन सारा !

 

छन्न पकैया छन्न पकैया, अब सुन लो त्रिपुरारी

दूर करो इनकी भव बाधा, विघ्न विनाशक हारी !

 

छन्न पकैया छन्न पकैया, तुमको आना होगा

मौसम की विपरीत मार से, इन्हें बचाना होगा !

 

छन्न पकैया छन्न पकैया,  आने को दीवाली

भूखा रहे न कोई जग में, भर दो सबकी थाली !

  

छन्न पकैया छन्न पकैया, क्यों अनर्थ यह होता

कुछ की किस्मत में धन दौलत, भाग्य किसी का सोता ! 

 

छन्न पकैया छन्न पकैया, प्रगटो अब गिरिधारी

ध्यान धरो अपने भक्तों का, हर लो विपदा सारी !

 

छन्न पकैया छन्न पकैया, विकट समय यह कैसा

लाज बचा लो अपनी गिरिधर, करो पराक्रम ऐसा ! 

 

साधना वैद

Wednesday, September 15, 2021

खेल खेल में - एक लघुकथा

 



शाम होते ही बस्ती के सारे बच्चे खेलने के लिए आ जुटे ! आजकल उनका प्रिय खेल दुर्दांत आतंकियों और देश की सुरक्षा में तैनात फौजियों का होता है ! कुछ बच्चे नकली दाढ़ी लगा आतंकी बन जाते तो कुछ छोटी छोटी लाठियों को मशीनगन की तरह कंधे पर लाद फ़ौजी बन जाते और खेल शुरू हो जाता आतंकियों और फौजियों के बीच लुका छिपी का !

निकलो घर से बाहर ! नहीं तो एक एक को भून दिया जाएगा !दरवाज़े पर ज़ोर की ठोकर मार फ़ौजी घर में छिपे आतंकियों पर गरजा !

तिरंगे कपड़े में मुँह छिपाए एक बूढ़ा थर थर काँपता हुआ बाहर आया !

हम तो इसी गाँव के हैं हुज़ूर आपको ग़लत खबर मिली है ! हम आतंकी नहीं हैं ! आतंकी के भेस में बूढ़ा गिड़गिड़ाया !

फ़ौजी तिरंगा खींच कर जैसे ही ज़मीन पर फेंकने को हुआ आतंकी की भूमिका करने वाला रोहित ज़ोर से चिल्लाया,

पागल हो गया है क्या दीनू ! तिरंगा ज़मीन पर फेंकेगा !और झंडा हाथ में ऊँचा उठा वन्दे मातरम्का जयकारा लगाते हुए उसने दौड़ लगा दी ! फ़ौजी और आतंकी सारे बच्चे उसके पीछे पीछे ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’ नारा लगाते हुए दौड़ पड़े !


साधना वैद

 


Tuesday, September 14, 2021

है भारत की शान तिरंगा

 




 


मस्ती में झूमे

सातों गगन चूमे

तिरंगा प्यारा

 

मिली आज़ादी

विहँसी माँ भारती

प्रफुल्ल देश

 

झूमे मगन

लहराए तिरंगा

हर्षित धरा

 

न्यारा तिरंगा

है भारत की शान

विश्व भर में

 

देता सन्देश

शक्ति, शांति, समृद्धि

गर्वित देश

 

देता है शिक्षा

साहस आध्यात्म की

केसरी रंग

 

देता सन्देश

प्रेम औ' सद्भाव का

सफ़ेद रंग

 

हरित रंग

प्रतीक उन्नति का

समृद्ध देश


अशोक चक्र

प्रतीक है न्याय का

नीलम वर्णी

 

है सुसज्जित

मध्य श्वेत रंग के

धर्म सूचक 

 

देते हैं जान

अपने तिरंगे पे

भारत वासी

 

पूजते इसे

श्रद्धा से झुक कर

हैं देश वासी

 

 

साधना वैद

 

 

 

 

 


Tuesday, September 7, 2021

वर्ण पिरेमिड

 



क्या

जानें

आओगे

भुलाओगे

कौन बताये

   किस्मत हमारी   

  फितरत तुम्हारी !

 

है

पता

मुझे भी

आसाँ नहीं

दुःख भुलाना

पर करें भी क्या

ज़ालिम है ज़माना

 

हे

प्रभु

आशीष

देना हमें 

न चाहें सुख

कर्तव्य पथ से

न हों कभी विमुख

 

ये

फूल

खिलते

महकते

मुस्कुराते हैं

हमें सुखी कर

  भू पे बिछ जाते हैं !

 

साधना वैद  

 


Sunday, September 5, 2021

गुरु और शिष्य




शिक्षक दिवस पर विशेष

गुरू रहे ना देव सम, शिष्य रहे ना भक्त
बदली दोनों की मती, बदल गया है वक्त !

शिक्षक व्यापारी बना, बदल गया परिवेश
त्याग तपस्या का नहीं, रंच मात्र भी लेश !

बच्चे शिक्षक का नहीं, करते अब सम्मान
मौक़ा एक न छोड़ते, करते नित अपमान !

कहते विद्या दान से, बड़ा न कोई दान  
लेकिन लालच ने किया, इसको भी बदनाम !

कोचिंग कक्षा की बड़ी, मची हुई है धूम
दुगुनी तिगुनी फीस भर, माथा जाये घूम !

साक्षरता के नाम पर, कैसी पोलम पोल
नैतिकता कर्तव्य को, ढीठ पी गए घोल !

सच्चे झूठे आँकड़े, भरने से बस काम
प्रतिशत बढ़ना चाहिए, साक्षरता के नाम !

कक्षा नौ में छात्र सब, दिए गए हैं ठेल
जीवन के संघर्ष में, हो जायेंगे फेल !

 ऐसी शिक्षा से भला, किसका होगा नाम !
लिख ना पायें नाम भी, ना सीखा कुछ काम !

करना होगा पितृ सम, शिक्षक को व्यवहार
रखें शिष्य भी ध्यान में, सविनय शिष्टाचार !

अध्यापक और छात्र में, हो न परस्पर भीत  
जैसे भगवन भक्त में, होती पावन प्रीत !

गुरु होते भगवान सम, करिए उनका मान 
विद्यार्थी संतान सम, रखिये उनका ध्यान !


साधना वैद

Sunday, August 29, 2021

जन्मे कन्हैया

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सभी को हार्दिक बधाई 


कब आओगे 
इस कलयुग में 
कृष्ण कन्हाई 

आ जाओ अब 
मुरली मनोहर 
लो बाधा हर 

राह निहारें 
अनगिन अर्जुन
आज तुम्हारी 

हुई स्वीकृत
हमारी मनुहार 
जन्मे कन्हैया 

जन्मे कन्हाई 
नन्द यशोदा घर 
बजी बधाई 

झूमी धरती 
झूमा अम्बर सारा 
प्रजा हर्षाई 

जीतेगा प्रेम 
बजेगी बाँसुरिया 
सृष्टि सजेगी 

होगी स्थापना 
जगत में धर्म की 
आशा जगाई  !

मंगल गाओ 
गूँजी किलकारियाँ
जन्मा मोहन 

अल्हड़ नदी
छूकर प्रभु पग  
हुई निहाल 

आनंद छाया 
हर जन हर्षाया 
गोकुल धाम 

है जन्माष्टमी
सब मिल मनाओ 
भक्ति भाव से 

साधना वैद

Friday, August 27, 2021

गोल्डन चांस

 


हमारे देश की कई दुखी आत्माओं के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है ! दुनिया में इसी ज़मीन पर एक और जन्नत का अवतरण हुआ है ! एक और नितांत पाक साफ़ देश अस्तित्व में आ गया है जहाँ सारे कायदे क़ानून शरीया के लागू होते हैं, तीन तलाक पर कोई पाबंदी नहीं है, चार चार निकाह को जायज़ माना जाता है ! न परिवार नियोजन का कोई झंझट है न उदारवादिता के नाम पर खातूनों को फ़िज़ूल की आज़ादी दी जाती है ! समाज बिलकुल पाक साफ़ रहे और उसमें कोई अनुशासनहीनता न आने पाए इसके लिए को - एजूकेशन पर ही पाबंदी लगा दी गयी है ! जीवन भी तो देखिये कितना आसान और सस्ता है ! पेट्रोल सिर्फ पचास रुपये लीटर है, बीफ खाने पर भी कोई रोक नहीं है, फल फ्रूट मेवों के बाग़ ही बाग़ हैं ! जन्नत और किसे कहते हैं ! और फिर ऐसा सुअवसर और कब मिलेगा ! इन दिनों रोज़ खाली जहाज़ इस जन्नत में जा रहे हैं और वहाँ से भर भर कर भारतीय मूल के लोगों को वापिस स्वदेश ला रहे हैं ! मेरी गुज़ारिश उन सभी भाई बहनों से है जो इस मुल्क में खुद को असुरक्षित और असहज मानते हैं, जिन्हें लगता है उनके धार्मिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है और उन्हें उनके धर्म के अनुसार नहीं रहने दिया जा रहा है वे इस गोल्डन चांस का फ़ायदा ज़रूर उठायें क्योंकि जीवन में ऐसे शानदार मौके बार बार नहीं आते ! 


साधना वैद

Friday, August 20, 2021

आतंकी राज


 


चीखती रूहें 

खौफनाक मंज़र

भागते लोग 


शर्मिंदा खुदा

ग़मज़दा आयतें

धर्म का सोग


इंसानियत 

हो गई शर्मसार

बहरा खुदा 


अपने बंदे

भटकें इंसाफ को 

सबसे जुदा 


पर्दों के पीछे 

धकेली गई स्त्री

कैसा इंसाफ


आधी आबादी

कर जग रौशन

हुई बर्बाद 


आतंकी आका 

खौफजदा जनता 

ज़िंदगी जेल


बचा ले मौला

तेरे ही तो बंदे हैं 

रोक ये खेल 


साधना वैद

Monday, August 16, 2021

स्वतन्त्रता दिवस

 



भारत वर्ष
वर्षों की दासता से
उन्मुक्त हुआ
टूटी श्रंखला
ख़त्म हुई गुलामी
स्वाधीन हुआ
राष्ट्रीय पर्व
स्वतंत्रता दिवस
हमारा मान
विश्व भर में
सशक्त भारत की
है पहचान
लाल किले पे
लहराता तिरंगा
गर्वित हम
अभिभाषण
देश के प्रधान का
हर्षित हम
उद्बोधन में
संघर्ष चुनौती की
कितनी बातें
कुटिल शत्रु
आतंकी दुश्मन की
कितनी घातें
जूझे उबरे
हर बार शत्रु को
धूल चटा के
चाल अरि की
भटकाना सबको
ध्यान बँटा के
वीर सेनानी
सिरमौर देश के
हमारी शान
रक्षण करें
जान पर खेल के
वीर जवान
सदा रखेंगे
सकल जगत में
देश का मान
जय भारत
जय जय भारत
जय भारती



साधना वैद

Saturday, August 14, 2021

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

 


स्वाधीनता दिवस की हीरक जयन्ति के उपलक्ष्य में विशिष्ट प्रस्तुति

मस्ती में झूमे
सातों गगन चूमे
 तिरंगा प्यारा !

मिली आज़ादी
विहँसी माँ भारती
 प्रफुल्ल देश !

झूमे मगन
लहराए तिरंगा
 हर्षित धरा !

जिये आन से
सीमा की सुरक्षा में
मरे शान से !

देश महान
तुझ पर कुर्बान
 है मेरी जान !

बुलंद नारे
गर्वित लाल किला
 जोश में प्रजा !

देश की शान
भारत के गौरव
 वीर जवान !

संकल्प लेंगे
अपने भारत का
 मान रखेंगे !

वीर सैनिक
सीमा के रखवाले
 माँ के दुलारे !

ऋणी रहेगा
तुम्हारी कुर्बानी का
 भारत सारा !

जोड़ा है रिश्ता
तोप बन्दूक संग
किया विवाह
देश की सुरक्षा से
 सीमाएं ससुराल !

निज रक्त से
करते अभिषेक
सजाते भाल
ऐसे वीर सपूत
 डरे जिनसे काल !

कहो शान से
शायर ने भी कहा
दिलो जान से
सारे जहाँ से अच्छा
 हिन्दोस्तान हमारा !

आन रखेंगे
अपने भारत का
मान रखेंगे
सूर्य से भी ऊपर
 तेरा नाम रखेंगे !

सुनो न देव
बार-बार जनमूँ
इसी देश में
और फिर मिलूँ भी
 वतन की माटी में !


साधना वैद

सभी  पाठकों को स्वतन्त्रता दिवस की हीरक जयन्ति पर हार्दिक शुभकामनायें !