Followers

Monday, August 15, 2022

पर्यावरण चिंतन

 



पर्यावरण संरक्षण पर कुछ हाइकू

 

धुएँ ने किये

चाँद सूरज तारे

अवगुंठित

 

स्वार्थी मानव

युद्ध की विभीषिका

दहकी धरा

 

क्रुद्ध प्रकृति

दोहन का उत्तर

विनाश लीला  

 

तैरते शव

प्रदूषित नदियाँ

पंकिल जल

 

कटे जो वन

पंछी हुए बेघर

उजड़े नीड़

 

ऊँचे भवन

कंक्रीट के जंगल

घुटती साँस

 

शोर शराबा

कष्टप्रद ध्वनियाँ

कैसा संगीत

 

बीमार सोच

बीमार परिवेश

रुग्ण समाज

 

बचाना होगा

हर प्रदूषण से

वातावरण

 

करें चिंतन

कैसे करेंगे स्वच्छ

पर्यावरण  

 

धारें संकल्प  

धरा को प्रदूषित

होने न देंगे !

 

साधना वैद

 

 

 

 

 


10 comments :


  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (१५-०८ -२०२२ ) को 'कहाँ नहीं है प्यार'(चर्चा अंक-४५२३) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद अनीता जी ! बहुत बहुत आभार आपका ! सप्रेम वन्दे !

      Delete
  2. धारें संकल्प

    धरा को प्रदूषित

    होने न देंगे !
    -काश,सभी का यह चिंतन और आचरण हो !
    -

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद प्रतिभा जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

      Delete
  3. पर्यावरण

    क्यों चिंता की जाए

    माल बनाओ

    ReplyDelete
    Replies
    1. पर्यावरण की चिंता तो आवश्यक है गोपेश जी ! यह हमारे ही हित का सवाल है ! हार्दिक आभार आपका !

      Delete
  4. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद जीजी ! बहुत बहुत आभार !

      Delete
  5. बढ़िया हाइकू

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद ओंकार जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

      Delete