Followers

Saturday, February 14, 2026

नई विधा - जो दोनों ओर से पढ़ी जा सके

 




झीना था प्रतिरूप तुम्हाराछीना था हर चैन हमारा

अच्छा था मोहक था खेलसच्चा था रोचक था मेल

करते रहे तुम्हें हम दूरकहते रहे तुम्हें हम हूर

छलना था कितना आसानकहना था बस दो फरमान  

 

तुमको हमने चाहा यह सुख अपना था

तुमको पा हम लेंगे यह एक सपना था !

सपने लेकिन होते हैं केवल सपने

हमको पल-पल तिल-तिल करके तपना था !

 

जागी जगती, जागे पक्षी, जलचर जागे

जागी धरती, तारे, चंदा, अम्बर जागे

जागो तुम अब जाग गया सूरज देखो

जागी प्रकृति सकल सृष्टि अंतर जागे !

 

साधना वैद

 


No comments :

Post a Comment