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Wednesday, February 4, 2026

कोशिश कम रही

 






वक्त के उजले सफों पर गर्द सी कुछ जम रही
लाख चाहा भूलना पुरज़ोर, कोशिश कम रही !
हमकदम, न हमनफस, न हमसफर है साथ में
राहे मंज़िल पर अभी से चाल क्यूँ है थम रही !



चित्र - गूगल से साभार 


साधना वैद

4 comments :

  1. मार्मिक!! पर कोई है जो कभी साथ नहीं छोड़ता

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    1. हार्दिक धन्यवाद अनीता जी ! आभार आपका !

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  2. Replies
    1. धन्यवाद विश्वमोहन जी ! आभार आपका !

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