वक्त के उजले सफों पर गर्द सी कुछ जम रहीलाख चाहा भूलना पुरज़ोर, कोशिश कम रही !हमकदम, न हमनज़र, न हमसफर है साथ मेंराहे मंज़िल पर अभी से चाल क्यूँ है थम रही !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
No comments :
Post a Comment