वक्त के उजले सफों पर गर्द सी कुछ जम रहीलाख चाहा भूलना पुरज़ोर, कोशिश कम रही !हमकदम, न हमनफस, न हमसफर है साथ मेंराहे मंज़िल पर अभी से चाल क्यूँ है थम रही !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
मार्मिक!! पर कोई है जो कभी साथ नहीं छोड़ता
हार्दिक धन्यवाद अनीता जी ! आभार आपका !
बहुत सुंदर!
धन्यवाद विश्वमोहन जी ! आभार आपका !
मार्मिक!! पर कोई है जो कभी साथ नहीं छोड़ता
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद अनीता जी ! आभार आपका !
Deleteबहुत सुंदर!
ReplyDeleteधन्यवाद विश्वमोहन जी ! आभार आपका !
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