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Thursday, March 19, 2026

हासिल

 



आज ओम प्रकाश जी के घर में उत्सव का माहौल है ! वर्षों से चले आ रहे ज़मीनी विवाद के मुकदमे का फैसला आखिरकार आज उनके हक़ में आ ही गया ! उनका छोटा भाई सूरज प्रकाश, जो गाँव के प्राइमरी स्कूल में टीचर है और आर्थिक रूप से भी कमज़ोर है, मुकदमा हार गया ! इस मुकदमे को जीतने के लिए कुछ कम करतब तो ओमप्रकाश जी ने भी नहीं किये थे ! कितनी तो तिकड़में लगाईं, कितनी चालें चलीं, अधिकारियों की जेबें भरने के लिए पैसा भी कम नहीं बहाया ! तो जीत तो उनके पाले में आनी ही थी ! सूरज प्रकाश की कहाँ औकात थी उनसे मोर्चा लेने की ! प्राइमरी स्कूल का अदना सा शिक्षक, बच्चों को नैतिक शिक्षा और सदाचरण का पाठ ही पढ़ाता रह गया और मुकदमे की मार से और गरीब होता चला गया ! नैतिक शिक्षा की चादर ओढ़ कर आज की दुनिया में कहीं मुकदमे जीते जाते हैं ?

रात भर ओमप्रकाश जी के घर में शराब और शबाब के दौर चलते रहे ! बड़े-बड़े नेता, विधायक, अधिकारी सभी आमंत्रित थे ! सूरज प्रकाश के घर में आज अंधकार छाया था ! रात को चूल्हा भी न जला था ! बच्चों को मन मसोस कर सुबह के बचे खाने से कुछ निवाले खिला दिए घरवाली ने और दोनों पति पत्नी दो घूँट पानी पीकर सोने का उपक्रम करते रहे ! बड़े भाई के घर के जश्न की आवाजें मन पर घन की सी टंकार करती रहीं !

सुबह हो गयी थी ! ओमप्रकाश जी के घर से जश्न की आवाजें आना बंद हो चुकी थीं लेकिन आगंतुकों की आवाजाही बढ़ गयी थी ! तभी सूरज प्रकाश का बड़ा बेटा घबराया हुआ आया !

“पापा, ताऊजी को बड़े जोर का हार्ट अटैक आया है ! गाँव के सारे डॉक्टर्स आये हैं ! शहर के बड़े अस्पताल ले जाने की बात हो रही है ! आप चलिए ना !”

उद्विग्न सूरज प्रकाश चप्पल भी नहीं पहन पाए कि गगन भेदी विलाप के स्वर वातावरण में गूँज उठे ! सालों की जद्दोजहद के बाद मिली जीत को ओम प्रकाश जी चौबीस घंटे भी मना नहीं सके ! मुकदमा जीतने के बाद आखिर हासिल क्या हुआ उन्हें सब यही सोच रहे थे !


चित्र - गूगल से साभार 



साधना वैद
 


8 comments :

  1. जाने क्यों जर-ज़मीन के फेर में लोग श अपने-पराये किसी के साथ भी कुछ भी व्यवहार करते हैं उनकी ये समझ ही नहीं आता कि कुछ साथ तो ले जाना है सब यहीं रह जाना है।
    कटु सत्य का संदेशा देती बहुत अच्छी लघुकथा।

    सादर।
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    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार २० मार्च २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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    1. हार्दिक धन्यवाद श्वेता जी ! घर में मेहमान आए हुए थे ! आपका संदेश अभी देखा ! सप्रेम वंदे एवं आभार !

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  2. रहना नहीं देस बिराना है, कबीर को भूल गए, तुलसी को भूल गए, लोभ में इंसान शास्त्रों को भूल गये

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    1. जी बिलकुल ! सत्य कहा आपने अनीता जी ! आभार आपका !

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  3. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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    1. हार्दिक धन्यवाद भारती जी ! आभार आपका !

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  4. बढ़िया कहानी

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    1. हार्दिक धन्यवाद ओंकार जी ! दिल से आभार !

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