आज श्रेया बहुत खुश थी उसका जन्मदिन जो था और आज पापा ने प्रोमिस किया था कि वे उसका जन्मदिन सब बच्चों के साथ शहर के सबसे मशहूर स्थान चोखी धाणी में मनाएंगे ! वहाँ का खाना तो बहुत स्वादिष्ट होता ही है वहाँ मनोरंजन के लिए भी बहुत सारी गतिविधियाँ हैं जैसे ऊँट की सवारी, चरखी वाला झूला, जादू का खेल और नटों के करतब ! सबसे बड़ी बात वहाँ का पारम्परिक खाना दादी को भी बहुत पसंद आता है !
पापा के कहने पर श्रेया शाम की पार्टी की बात बताने दादी के पास पहुँची तो देखा दादी काम की तलाश में आई किसी महिला से बातों में उलझी हुई थीं !
“यहाँ आने से पहले किसके घर में काम करती थीं ? वहाँ कितने पैसे मिलते थे ? कौन जात हो ?”
महिला सवालों की बौछार से घबरा सी गई !
“माताजी हम महार हैं ! बगल वाले भल्ला जी के यहाँ काम किया है ! अभी उनकी दूसरे शहर में बदली हो गई है तो नया काम देख रही हूँ !”
दादी सुनते ही चौंक गईं ! “महार हो तो तुमसे कैसे काम करवाएंगे ! अपनी रसोई में तो हम तुम्हें जाने न देंगे ! अपना धरम थोड़े ही भ्रष्ट करना है हमें ! तुम कहीं और देखो काम !”
महिला मायूस होकर चली गई ! तभी पापा ने श्रेया से कहा, “बेटा आज की पार्टी में तो दादी नहीं जा पाएंगी ! बोलो तो पार्टी घर में ही मना लें ?”
“अरे, हम काहे नहीं जा पाएंगे ! हम तो ज़रूर जाएंगे बिटिया के जन्मदिन पर ! हमें तो वहाँ की दाल बाटी, चूरमा, खीर सभी बहुत पसंद आती हैं ! तुमसे कौन बोला हम नहीं जाएंगे !” दादी हैरान थीं !
“नहीं अम्माँ, वहाँ तुमको कैसे पता चलेगा कि खाना बनाने वाले की और परसने खिलाने वाली की जात कौन सी है ! कहीं तुम्हारा धरम भ्रष्ट हो गया तो क्या होगा !”
पापा और श्रेया का ठहाका बाहर तक गूँज रहा था और दादी खिसिया गई थीं !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
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