
शुभ दीपावली
जगमग दीपों की माला
द्वारे पर आज सजाई कि
लक्ष्मी जी राह ना भूलें ,
इतने अनगिन दीपों में
वह दीप कहाँ से लाऊँ
जो तुझको राह दिखा दे !
घर आँगन के तम को तो
इन दीपों ने हर डाला ,
वह ज्योति कहाँ से लाऊँ
जो तेरे मन के तम को
पल भर में ही हर डाले !
पूजा के पावन स्वर ने
इस घर को तो मंदिर सा
पावन पुनीत कर डाला ,
वह श्लोक कौन सा गाऊँ
जो तेरे मन की शुचिता
को सोते से आज जगा दे !
है आज दीवाली की बेला
है उच्छ्वसित यह प्रार्थना
सब हों सुखी, सब हों सफल
सम्पूर्ण हो हर कामना !
शुभकामना
शुभकामना
शुभकामना !
साधना वैद !