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Tuesday, October 18, 2011

हौसला


क्यों है हताशा साधना का

फल नहीं जो मिल सका ,

क्यों है निराशा वन्दना का

फूल जो ना खिल सका ,

हैं अनगिनत संभावनायें

राह में तेरे लिये ,

दीपक जला ले आस का, तम

दूर करने के लिये !

ले ले दुआ उनकी भरोसा

है जिन्हें तदबीर पर ,

तू थाम उनका हाथ तत्पर

जो कि तेरी पीर पर ,

जो जीतना ही है जगत को

हौसला चुकने ना दे ,

होगी सुहानी भोर भी तू

रात को रुकने ना दे !

साधना वैद