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Friday, December 19, 2014

आतंकी नाच




फिज़ां में खौफ
दस्तक आतंक की
मासूम मौतें !

आतंकी खेल
सहमे से चेहरे
खूनी दरिंदे !

खूनी संगीनें
खौफनाक मंज़र
रोते माँ बाप !

बच्चों की लाशें
बिलखते माँ बाप
खामोश खुदा !

शातिर चालें
सियासी दांव पेंच
जुबानी बातें !

हैरान सारे
दहशत के मारे
शर्मिन्दा खुदा !

आतंकी नाच
ग़मज़दा माहौल
सुन्न सन्नाटा !

विषैली धरा
नफ़रत के बीज
हिंसा की खाद
फसल में उगते
बेरहम दरिंदे !

देख ले खुदा
कैसे बनाए तूने
वहशी बंदे
फर्क ना कर पाए
पाप और पुण्य में !

कहाँ सो गया
मेहरबान मौला
झेल न पाया
यह आतंकी खेल
अपने ही बन्दों का !

बख्शना मत
रहमान अल्लाह  
सख्त सज़ा दे
वहशी दरिंदों को
बच्चों के कातिलों को !

साधना वैद !