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Monday, February 29, 2016

आ गया बसंत है


मंगल गाओ 
ऋतुराज पधारे 
द्वार सजाओ ! 

फूलों के बाण
 सकुचाई सी प्रिया 
मुग्ध मदन !

दूर मंज़िल 
उदास मधुमास 
तुम न पास ! 

जता देते हैं 
भ्रमर के सुगीत 
बसंत आया ! 

प्रेम दिवस 
चिरंतन प्रेम को 
बौना बनाए ! 

रंगों का खेल 
खेल रही प्रकृति 
फूलों के संग ! 

आम का बौर 
सुरभित पवन 
कूके कोकिला ! 

अल्पना सजी 
घर आँगन द्वारे 
साँझ सकारे ! 

पुकारे धरा 
आ गया बसंत है 
गाये गगन 
आ गया बसंत है 
आ गया बसंत है !



साधना वैद