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Wednesday, May 15, 2019

बदलाव की सुखद बयार




रोज़ सुबह की चाय के साथ समाचार पत्र उठाती हूँ और कुछ ही देर में विरक्त होकर एक तरफ डाल कर किसी और काम में मन रमाने की कोशिश करती हूँ ! रोज़ वही ह्त्या, लूट, छेड़ छाड़, बलात्कार, दुर्घटनाओं और अलग-अलग पार्टियों के छोटे बड़े नेताओं की बेमतलब बयानबाजियों के समाचारों से इतनी ऊब हो गयी है कि अखबार की ओर देखने का भी मन नहीं करता ! लेकिन आज एक इतनी बढ़िया खबर पढ़ने को मिली कि दिल बाग़-बाग़ हो गया ! सोचा आप सबके साथ भी शेयर कर ही लूँ ताकि जो नहीं पढ़ सके वे भी यहाँ पढ़ कर खुश हो जाएँ !
किस्सा कुछ यूँ है कि एक शहर में किसी लड़की के विवाह का आयोजन था ! बरात का भोज चल रहा था ! भोजन के किसी आइटम में नमक मिर्च की मात्रा को लेकर वाद विवाद हो गया ! वाद विवाद ने झगड़े का रूप ले लिया ! मामले ने इतनी तूल पकड़ ली कि मार पीट की नौबत आ गयी और घराती व बराती आपस में भिड़ गए ! ताज्जुब की बात यह है कि आज के युग में भी ऐसे नमूने लोग हमारे समाज में मौजूद हैं जो खाने के किसी आइटम में नमक मिर्च कम या ज्यादह हो जाने पर इस तरह से रंग में भंग करने की हिमाकत भी कर सकते हैं ! खैर मारे गुस्से के तमतमाए लड़की के पिता ने अपनी लड़की ब्याहने से इनकार कर दिया और बारात बिना दुल्हन के वापिस लौटने लगी ! वापिस जाने से पहले दूल्हे ने अपनी होने वाली दुल्हन को फोन किया कि अगर शादी करना चाहती हो तो मेरे साथ चलो ! और लड़की अपने पिता और घर वालों की रजामंदी के खिलाफ बरात के साथ ससुराल चल दी ! बारातियों ने स्थानीय लोगों से मदद माँगी जिसके लिए सब सहर्ष तैयार हो गए और एक मंदिर में जाकर विधि विधान के साथ विवाह का कार्यक्रम संपन्न हुआ ! एक पड़ोसी दम्पत्ति ने कन्यादान किया ! मंदिर में बैंड बाजे शहनाई इत्यादि के अभाव को भी बड़ी खूबसूरती के साथ मंदिर के बाहर बैठे चंद सपेरों ने अपनी बीन बजा कर पूरा कर दिया !
इस रोचक किस्से को पढ़ कर वाकई मन प्रसन्न हो गया ! ज़माने में बदलाव की सुखद बयार चलने लगी है ! लड़कियाँ अब बेजान मेज़ कुर्सी की तरह नहीं रह गयी हैं जिन्हें माता पिता जहाँ चाहें रख दें और जब चाहें हटा दें ! वे अपने फैसले खुद लेने लगी हैं और बात अगर ग़लत हो तो माता पिता का विरोध भी कर सकती हैं ! शाबाश है ऐसी बेटियों को ! आप स्वयं पढ़ें इस समाचार को !
साधना वैद

7 comments :

  1. व्वाहहहहह...
    सादर नमन..

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (17-05-2019) को "बदलाव की सुखद बयार" (चर्चा अंक- 3338) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. हार्दिक धन्यवाद दिग्विजय जी ! बहुत-बहुत आभार आपका !

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  4. आपका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी !सादर वन्दे!

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  5. बहुत खूब , ,अब बदलाव जरूर आयेगा ,सादर नमस्कार दी

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  6. धन्यवाद कामिनी जी ! आमीन कहने का मन हो रहा है !

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