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Wednesday, September 30, 2020

माँ मुझको भी रंग दिला दे

 



माँ मुझको भी रंग दिला दे
मुझको जीवन रंगना है
सपनों के कोरे कागज़ पर
इन्द्रधनुष एक रचना है !
लाल रंग से मैं अपना
सौभाग्य लिखूँगी माथे पर
नारंगी से हर्ष और
उल्लास रचूँगी माथे पर !
पीला रंग जीवन में मेरे
ज्ञान बुद्धि भर जायेगा
हरा रंग आध्यात्म और
प्रकृति से मुझे मिलायेगा !
नीले रंग से धैर्य, न्याय के
गुण मैं चित्रित कर लूँगी
जामुनी रंग से निर्भय होकर
दूर गगन तक उड़ लूँगी !
रंग बैंगनी मानवता के
सद्गुण मुझमें भर देगा
माँ रंगों का तोहफा मेरे
सब सपने सच कर देगा !
इन्द्रधनुष के रंगों से
जीवन मेरा खिल जायेगा
मेरे हर सपने को जैसे
नया अर्थ मिल जायेगा !


साधना वैद

14 comments :

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 02-10-2020) को "पंथ होने दो अपरिचित" (चर्चा अंक-3842) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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    1. हार्दिक धन्यवाद मीना जी ! बहुत बहुत आभार आपका ! सप्रेम वन्दे !

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  2. Nice Line.....
    Please visit my site https://www.khamoshhasratein.com/

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  3. हार्दिक धन्यवाद महोदय ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  4. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद शांतनु जी ! स्वागत है आपका मेरे इस ब्लॉग पर !

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  5. बढ़िया प्रस्तुति

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    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

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  6. रंगों के संंयोजन से ही जीवन्त सौन्दर्य रूप लेता है .

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    1. हार्दिक धन्यवाद प्रतिभा दीदी ! स्वागत है आपका ! हृदय से बहुत बहुत आभार आपका !

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  7. बहुत सुंदर रचना

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    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार अनुराधा जी ! रचना आपको अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ !

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  8. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 02 अगस्त 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  9. वाह बेहतरीन सृजन

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