Followers

Sunday, November 29, 2020

उम्र का तकाज़ा




भूलने की बीमारी हो गयी है
उम्र का तकाज़ा है
कुछ भी दिमाग में सहेज कर
नहीं रख पाती अब
यह कैसा भुलावा है !
याद है बस बरसों पहले
ज़ेहन में खुदी एक तिथि
जिस दिन तुम्हें
आख़िरी बार देखा था
और याद है वह दूसरी तिथि
जिस दिन तुमने मुझसे
फिर मिलने का वचन दिया था !
वर्षों गुज़र गये
हर दिन कैलेण्डर में
उन तारीखों को देखती हूँ और
उन्हीं की नित क्षीण होती जाती रोशनी में
अपने जीवन की राह खोजती हूँ !
बस जैसे कुछ और बाकी ही न रहा !
लेकिन क्या हुआ बोलो तो ?
मुझे उन तिथियों के सिवा
अब कुछ याद नहीं !
और तुम ...... ?
तुम्हें शायद
उन तिथियों के अलावा
बाकी सब कुछ याद रहा !


चित्र - गूगल से साभार


साधना वैद

22 comments :


  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (३०-११-२०२०) को 'मन तुम 'बुद्ध' हो जाना'(चर्चा अंक-३९०१) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार अनीता जी ! सप्रेम वन्दे !

      Delete
  2. बहुत सुन्दर !
    ये न थी हमे क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता ---

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद गोपेश जी ! आभार आपका !

      Delete
  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद ज्योति जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

      Delete
  4. याद है बस बरसों पहले
    ज़ेहन में खुदी एक तिथि
    जिस दिन तुम्हें
    आख़िरी बार देखा था
    और याद है वह दूसरी तिथि
    जिस दिन तुमने मुझसे
    फिर मिलने का वचन दिया था !

    वाह...समाज के एक वर्ग को एक आईना चिंतनयुक्त रचना।
    साधुवाद। ।।।।

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद पुरुषोत्तम जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

      Delete
  5. मुझे उन तिथियों के सिवा
    अब कुछ याद नहीं !
    और तुम ...... ?
    तुम्हें शायद
    उन तिथियों के अलावा
    बाकी सब कुछ याद रहा !

    बहुत ख़ूबसूरत
    दर्पण सदृश।
    सादर।

    ReplyDelete
    Replies
    1. इस ब्लॉग पर हृदय से स्वागत है आपका सधु जी ! आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार !

      Delete
  6. बहुत सुन्दर।
    गुरु नानक देव जयन्ती
    और कार्तिक पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपको भी हार्दिक शुभकामनाएं शास्त्री जी ! आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी !

      Delete
  7. वेदना का निश्छल प्रकटीकरण। भूलनेवालों को कहाँ कुछ याद रहता है !

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद मीना जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

      Delete
  8. Replies
    1. हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद आपका शांतनु जी ! आभार !

      Delete
  9. सुन्दर रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! बहुत बहुत आभार आपका !

      Delete
  10. हृदयस्पर्शी ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. स्वागत है अमृता जी ! दिल से बहुत बहुत आभार आपका !

      Delete
  11. भावपूर्ण रचना |मन को छू गई |

    ReplyDelete
    Replies
    1. अरे वाह ! हृदय तल से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार जीजी !

      Delete