सीला सावन, तृषित तन मन, दूर सजन
मुग्ध वसुधा, उल्लसित गगन, सौंधी पवन
व्याकुल बूँदें, बिखर धरा पर, बुलाएं तुम्हें
गाते विहग, सुरभित सुमन, आओ सजन !
आया सावन, सुन कर पुकार, धरा मुस्काई
फूल ही फूल, चूनर में अपनी, टाँक ले आई
बरसी बूँदें, गरजे घन घटा, तड़पे जिया
हर्षित धरा, लहरा के आँचल, ले अँगड़ाई !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 23 अगस्त 2026 को लिंक की गयी है....
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आमंत्रण की सूचना में देरी के लिये क्षमा।