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Friday, August 21, 2026

हाइकु मुक्तक - सावन

 



सीला सावन, तृषित तन मन, दूर सजन 

मुग्ध वसुधा, उल्लसित गगन, सौंधी पवन

व्याकुल बूँदें, बिखर धरा पर, बुलाएं तुम्हें

गाते विहग, सुरभित सुमन, आओ सजन ! 


आया सावन, सुन कर पुकार, धरा मुस्काई 

फूल ही फूल, चूनर में अपनी, टाँक ले आई 

बरसी बूँदें, गरजे घन घटा, तड़पे जिया

हर्षित धरा, लहरा के आँचल, ले अँगड़ाई !


चित्र - गूगल से साभार 

साधना वैद 




1 comment :

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 23 अगस्त 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


    !

    आमंत्रण की सूचना में देरी के लिये क्षमा।

    ReplyDelete