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Saturday, March 12, 2016

है भारत का बेटा




प्रिये सोचता था जब आयेगी होली

रंगूंगा तबीयत से प्रिया अपनी भोली ! 


छकाऊँगा जी भर तुम्हें कुमकुमों से

सताऊँगा मल-मल के चेहरा रंगों से !


मनाउँगा होली सभी दोस्तों संग

पिलाउँगा भोले का शरबत मिला भंग !


खिलाउँगा पकवान माँ के बनाये  
न जाउँगा घर से किसीके बुलाये !
 
कहाँ सोचा था ऐसी आयेगी होली

कि जाउँगा मैं लाम पर छोड़ खोली !


हूँ फ़ौजी हुकुम मानना ही पड़ेगा

कहीं भी हो ड्यूटी तो जाना पड़ेगा !


कोई डर नहीं और आयेंगी होली

मनायेंगे सब मिल के खुशियों में घोली !


अभी तो छुड़ाने हैं दुश्मन के छक्के

न आये दोबारा कभी फिर से मुड़ के ! 


प्रिये सबसे होगी अनोखी ये होली

चलेंगी इस होली पे सचमुच की गोली !


रंगेंगे एक दूजे को निज रक्त से हम

चलेंगे दनादन हैंड ग्रेनेड और बम ! 


धरा होगी रंगीन खूँ से हमारे

क्या पता हम बचें या कि हों प्रभु को प्यारे !


जो न आऊँ मैं वापिस तो मत शोक करना 

यूँ मरना वतन पे है फौजी का गहना ! 


न रोना, कलपना, न आँसू बहाना

न मेरी शहादत को बौना बनाना ! 


ये कहना तिरंगे में जो वीर लेटा

है अभिमान मेरा, है भारत का बेटा !





साधना वैद