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Saturday, April 30, 2011

तस्वीर

तस्वीर एक बनाई थी मोहब्बत की कभी ,

हर इक नक्श को पलकों से तब सँवारा था !

वफ़ा के रंग भर दिए थे हर एक गुंचे में ,

हर इक पंखुड़ी पे नाम बस तुम्हारा था !

चाँद से नूर चाँदनी से माँग ली थी हँसी ,

ज़मीं पे दूर तलक खुशनुमां नज़ारा था !

सितारे टाँक लिये थे फलक के चूनर में ,

उन्हीं के नूर से रौशन जहाँ हमारा था !

ख़याल ओ ख्वाब लिये उड़ते थे हवाओं में ,

ज़मीं की सख्त फितरतों को कब निहारा था !

न जाने कैसे कहाँ टूट गये ख्वाब सभी ,

खुली जो आँख तो तनहा सफर हमारा था !

किसीने ने नोच लिये तिनके सब नशेमन के ,

ज़मीं पे बिखरा पड़ा आशियाँ हमारा था !

बहुत थी आरज़ू हमको तुम्हारी उल्फत की ,

बड़ी उम्मीद से हमने तुम्हें पुकारा था !

बहुत थे फासले और मुश्किलें भी थीं ज्यादह ,

खुद अपने आने पे भी बस कहाँ तुम्हारा था !

कहाँ थे फासले मीलों में या कि बस मन में ,

जो दुःख बस गया इस दिल में वो हमारा था !


साधना वैद