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Friday, February 10, 2012

तुम मिले जग मिल गया







कुछ मधुर तुम कान में जो कह गये

शूल मन के वेग से सब बह गये !


मलय ने आँचल मेरा लहरा दिया ,

भाव विह्वल गीत सारे हो गये !


पुष्प वासंती हृदय में खिल उठे ,

प्राण सुरभित एक पल में हो गये !


मन विहग ने क्षितिज तक भर ली उड़ान ,

स्वर मुखर हर इक दिशा में हो गये !


पवन पी पीयूष प्याला प्रेम का ,

प्रिय परस की वंचना में खो गये !


नयन उन्मीलित पुलक कर लाज से

प्रिय दरस की साध लेकर खुल गये !


अधर अस्फुट गीत दोहराते रहे ,

स्वप्न सब साकार जैसे हो गये !


निमिष भर को तुम मिले जग मिल गया ,

प्रार्थना के स्वर सफल सब हो गये !



साधना वैद

27 comments :

  1. वाह ..बहुत सुन्दर और अलंकारों से सुसज्जित सुन्दर रचना ... पढ़ कर मन उल्लसित हो गया ..

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  2. बहुत ही सुन्दर अंतरमन को छु लेनेवाली
    प्रेम के भाव से सराबोर बेहतरीन रचना है...
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है ..समय मिले तो आइये जरुर ......

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  3. आदरणीय मौसीजी,सादर वन्दे,बहुत ही सुन्दर भावों का संयोजन है मन हर ले गई आपकी कविता |

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  4. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  5. अनुपम भाव संयोजन ..

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  6. बहुत सुन्दर ..
    मनोहारी रचना
    सादर नमन .

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  7. आदरणीय साधना वैद जी
    ... बेहद प्रभावशाली बेहतरीन रचना है
    मगर बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की बधाई

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  8. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  9. अच्छा शब्द चयन और बहुत सुन्दर रचना |गहन भाव |मन को छू गयी |
    आशा

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  10. प्रेमपरक सुन्दर रचना है.

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  11. मन विहग ने क्षितिज तक भर ली उड़ान ,
    स्वर मुखर हर इक दिशा में हो गये !

    क्या बात....बड़ी खूबसूरती से मन के भावों को शब्द दिए हैं..
    प्रसन्नत बिखेरती..खिली खिली सी कविता

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  12. apka shabkosh to bahut vishal hai isme koi sanshay nahi....aur jis prakar sunder sashakt shabdo ka sanyojan kar apne ehsaso ko mukharta aap apni rachnao me aap deti hain uska b koi sani nahi hai.

    rajbhasha par apka intzar hai.

    aabhar.

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  13. निमिष भर को तुम मिले जग मिल गया ,
    प्रार्थना के स्वर सफल सब हो गये !
    अनूठे भाव, प्रेमरस में डूबी सुन्दर रचना... आभार

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  14. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार ११-२-२०१२ को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

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  15. आस्था और आशावादिता से भरपूर स्वर इस कविता में मुखरित हुए हैं।

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  16. पवन पी पीयूष प्याला प्रेम का ,

    प्रिय परस की वंचना में खो गये !

    अलंकार शब्द-चयन भाव ...एक सम्पूर्ण रचना ... प्रशंसनीय

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  17. बहुत ही खूबसूरत रचना।


    सादर

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  18. हलचल पर आपकी पोस्ट है ...साधना जी मेरी टिप्पणी कहाँ गयी ....?स्पैम में देखिये ....

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  19. बहुत सुंदर शाब्दिक चयन ..... मनमोहक रचना

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  20. आप सभी सुधी पाठकों का हृदय से आभार है !

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  21. मन विहग ने क्षितिज तक भर ली उड़ान ,
    स्वर मुखर हर इक दिशा में हो गये !kya sunder kavita hai.......wah.

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  22. अनुपम भाव संयोजन ..सशक्त रचना..

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  23. निमिष भर को तुम मिले जग मिल गया ,

    प्रार्थना के स्वर सफल सब हो गये !.....मन को छू गई आपकी प्रेम कवि‍ता।

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  24. //निमिष भर को तुम मिले जग मिल गया ,
    प्रार्थना के स्वर सफल सब हो गये !

    bahut hi sundar bhaav.. bahut achha laga padhke :)


    palchhin-aditya.blogspot.in

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  25. सुंदर गीत पढकर आनंदित हो उठा है मन. बहुत बधाई संगीता जी.

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  26. निमिष भर को तुम मिले जग मिल गया ,

    प्रार्थना के स्वर सफल सब हो गये !

    बहुत सही बात कही है , निमिष भर के सानिंध्य से आत्मा तृप्त हो जाती है.

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