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Monday, November 19, 2012

ये रिश्ते

दूर क्षितिज तक
रेलगाड़ी की
समानांतर पटरियों जैसे
साथ-साथ चलते रिश्ते
मैंने भी खूब निभाये हैं,
जिन पर सवार होकर
जाने कितने मुसाफिर
अपने गंतव्य तक
पहुँच गये लेकिन
पटरियाँ ताउम्र उसी तरह
एक दूसरे को
छुए बिना लोगों को
मंजिल तक
पहुँचाने का ज़रिया
बनी रहीं !
रंग बिरंगे उलझे धागों
में से सिरे ढूँढने की
कोशिश की तरह  
मैंने तमाम उलझे
रिश्तों को भी
पूरे मनोयोग से
सुलझाने की
कोशिश में
अपना सारा जीवन
लगा दिया
वांछित फल
कभी मिला तो
कभी नहीं मिला
लेकिन ज़िंदगी ज़रूर
एक अनवरत कोशिश
बन कर रह गयी !
वर्षों से 
वक्त की गर्द से
धुँधलाये, सँवलाये,
बदरंग रिश्तों को
लगन और मेहनत
सद्भावना और प्यार
के लेप से
घिस माँज कर
मैंने चमकाने की
चेष्टा की है !
रिश्ते तो शायद ज़रूर
कुछ चमक गये हों
लेकिन इस कोशिश में
मेरा चेहरा कुम्हला कर
कब बेरंग हो गया
इसका तो कभी
होश ही नहीं रहा !
बस अब यही कामना है 
थकी हुई नज़र,
टूटा हौसला
और थमती साँसें
मन की झुर्रियों को
इतना न बढ़ा दें
कि उस पर 
किसी रिश्ते का नाम
चिपकने से ही
इनकार कर दे
और रिश्ते सँवारने का
मेरा हर प्रयास
विफल हो जाये !

साधना वैद