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Saturday, March 29, 2014

तुझे देखा तो जाना



तुझे देखा तो जाना
कैसा होता है
एकाकीपन के दर्द को
चुपचाप झेलना,
कैसा होता है
चिलचिलाती धूप में
चुपचाप झुलसना,
कैसा होता है
सर्दी गर्मी बरसात में
बिना थके सदियों अहर्निश
चपचाप खड़े रहना,
कैसा होता है
नन्हे निर्मोही परिंदों को
आये दिन अपना कोटर छोड़
सुदूर गगन में उड़ कर
जाते हुए देखना,
कैसा होता है
झोंक देना अपना सारा जीवन
बिलकुल बेआस,
बेआवाज़   
एक बाँझ सी प्रतीक्षा में !

साधना वैद