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Tuesday, March 18, 2014

पंछी बावरा





जानती हूँ
तेरी प्यास अनंत है  
लेकिन नन्हे नादान
क्या करेगा तू जब
अपनी विपुल प्यास को
बुझाने के लिये तुझे
बूँद भर पानी भी
नसीब न हो सके !

तृषित ह्रदय चातक की तरह
तू भी बड़ी आस लिये
अपनी चोंच खोल
नल के नीचे आ बैठा है !
लेकिन बावरे पंछी
ओस के चाटे क्या
प्यास बुझ सकती है ?
                                                                         
क्या करेगा तू जब   
स्त्रोत ही सूख गया हो !
इतनी ज़रा सी बूँद तो
तेरे विदग्ध ह्रदय की
आँच से वाष्पित हो
तेरे शुष्क कंठ तक
पहुँचने से पहले ही हवा में
विलीन हो जायेगी !



मासूम परिंदे  
मुझसे तेरी यह विकलता
देखी नहीं जाती !
बस इतना ही कह सकती हूँ
दुनिया का कदाचित
यही दस्तूर है
और समझौते के अलावा
कोई और उपाय नहीं है !



                       

लेकिन मात्र समझौता

करने से ही तो साँसे

मोल नहीं ली जा सकतीं !

है ना ?

नन्हे परिंदे

इन सूखे नलों से

अमृतधारा के बहने

की प्रत्याशा निर्मूल है !

तेरा जीवन अनमोल है पंछी !

जीवन रक्षा के लिये

तुझे कोई और ठिकाना

ढूँढना ही होगा !

जहाँ तू जी भर पानी पीकर

अपने शुष्क कंठ को

तर कर सके

और तृप्त भाव से

एक ऐसी मीठी तान भर सके

जिसे सुन कर

सारा संसार झूम उठे !



साधना वैद