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Saturday, October 24, 2015

शिक्षक - जीवन शाला के



माँ
मैया तेरे प्यार का, कैसे होय बखान 
अम्बर सा व्यापक अरू, सागर सा धनवान ! 

माँ तेरे सान्निध्य का, हर पल था अनमोल 
जीवन जीने की कला, सिखा गया हर बोल !  



पिता 
नीति नियम के नियंता, घर में होते तात 
अनुशासन की राह पर, चलवाते दिन रात ! 

बरगद जैसी छाँह औ', बादल जैसा प्यार 
कड़वी बोली तात की, निर्मल जल की धार !


गुरू 
जीवन की पूँजी बना,  गुरू का शिक्षा दान 
जीते हर संघर्ष में, पाकर उनसे ज्ञान ! 

कच्ची माटी को दिया, रंग रूप अनमोल 
दुनिया भर के ज्ञान को, पिला दिया रस घोल !


सैनिक 
भारत माता की कसम, खाते वीर जवान 
सीमा की रक्षार्थ हित, देंगे अपनी जान ! 

ब्याह रचाया मौत से, रक्त लगाया भाल 
सेना बाराती बनी, सीमाएं ससुराल ! 

साधना वैद