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Thursday, October 1, 2015

कब आयेंगे राम



(१) 
दाता तेरे दान का, कोई ओर न छोर !
फिर भी डूबा लोभ में, पापी मन का चोर ! 

(२)
मालिक इतना दीजिये, जितनी है दरकार ! 
संचय के अपराध से, लीजे मुझे उबार ! 

(३)
अर्चन पूजन वंदना, किये नहीं स्वीकार ! 
मिली न अनुकम्पा कभी, व्यर्थ हुई मनुहार ! 

(४)
ना माणिक ना संपदा, देने को उपहार ! 
भाव कुसुम अर्पित करूँ, कर लो प्रभु स्वीकार ! 

(५)
रैन दिवस जपती रही, जिह्वा उनका नाम ! 
नैन बिछे हैं पंथ पर, बिना किये विश्राम ! 

(६)
इन्द्रिय सभी सचेत हैं, आहट पर हैं कान ! 
अंतर में मूरत बसी, उर में प्रभु का ध्यान ! 

(७)
बैठी काग़ज़ नाव में, करने सागर पार ! 
आ जाओ प्रभु तारने, थामो कर पतवार ! 

(८)
बाती बन जलती रही, डोर आस की थाम !
कौन जतन जानूँ सखी, कब आयेंगे राम ! 


साधना वैद