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Tuesday, April 14, 2026

फायकू - 2

 




लिख डाले कितने खत

जोश में हमने

तुम्हारे लिए

 

कितने ही कोरे कागज

रंग डाले हमने

तुम्हारे लिए

 

सोचते थे ले आएंगे

तोड़ कर तारे

तुम्हारे लिए

 

चाँद भी उतार लाएंगे

इस ज़मीन पर

तुम्हारे लिए

 

लेकिन चूर चूर हुआ

जो सपना देखा

तुम्हारे लिए

 

हम वंदनवार लगाते रहे 

चौक पुराते रहे

तुम्हारे लिए

 

हज़ारों दीप जलाते रहे

फूल बिछाते रहे

तुम्हारे लिए

 

पूरा घर सजाते रहे

रंगोली बनाते रहे

तुम्हारे लिए

 

तुम अनदेखा करते रहे

हम मिटते रहे

तुम्हारे लिए



चित्र - गूगल से साभार 

 

साधना वैद


8 comments :

  1. मिटकर ही तो वह मिलता है !!

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    1. हार्दिक धन्यवाद अनीता जी ! आभार आपका !

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  2. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद वर्मा जी !

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  3. वाह! बहुत सुंदर!!

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    1. दिल से आभार शुभ्रा जी !

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  4. सरल अंदाज़ में मन का भेद खोल दिया ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद नूपुरम जी ! आभार आपका !

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