वटवृक्ष सा
हमारा परिवार
शीतल छाँव
मासूम बच्चे
करते कलरव
गूँजता घर
बाबा की सीख
दादी की कहानियाँ
हमारी नींव
चाचा का लाड़
चाचियों का दुलार
बुआ का प्यार
माँ अन्नपूर्णा
पिता शिव शंकर
दीदी लक्ष्मी सी
सारे अपने
सुर नर किन्नर
स्वर्ग सा घर
बचपन का
अनमोल खजाना
अमीर हम
मिली सुशिक्षा
संस्कार, सुविचार
परिवार में
है परिवार
प्रथम पाठशाला
सब बच्चों की
अनुशासन,
सभ्यता, शिष्टाचार
सीखते यहीं
जीवन मूल्य
सीखे हमने इसी
परिवार में
बने समाज
सशक्त औ’ सुदृढ़
परिवारों से
जो कुछ पाया
उपकार मानते
परिवार का
मान मर्दन
कभी होने न देंगे
इस प्यार का !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
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