सीला सावन, तृषित तन मन, दूर सजन
मुग्ध वसुधा, उल्लसित गगन, सौंधी पवन
व्याकुल बूँदें, बिखर धरा पर, बुलाएं तुम्हें
गाते विहग, सुरभित सुमन, आओ सजन !
आया सावन, सुन कर पुकार, धरा मुस्काई
फूल ही फूल, चूनर में अपनी, टाँक ले आई
बरसी बूँदें, गरजे घन घटा, तड़पे जिया
हर्षित धरा, लहरा के आँचल, ले अँगड़ाई !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
No comments :
Post a Comment