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Monday, December 16, 2013

संकल्प



जीवन यदि सुरभित एवँ
निष्कंटक बनाना है तो
अंतर के सारे शूलों को
चुन कर मन उपवन के
कोने-कोने की
सफाई करनी होगी !  
हृदय के सारे गरल को
एक पात्र में एकत्रित कर  
नीलकंठ बन अपने ही
गले के नीचे
उतारना होगा !
अंतर में दहकते
ज्वालामुखी के सारे लावे को
सप्रयास बाहर निकाल
शीतल जल की फुहार से
उसके भीषण ताप को
ठंडा करना होगा !
हाथ भले ही जल जायें
हृदय में सुलगते अंगारों पर
राख डाल इस धधकती
अग्नि का भी शमन
करना ही होगा !
मन की नौका को
तट पर लाना है तो
सागर की उत्ताल तरंगों से
कैसा घबराना !
डूब जायें या तर जायें
पतवार उठा कर
नाव को तो खेना ही होगा !
मुझे पता है तूने
कभी हार नहीं मानी है
आज भी अपने कदमों को
डगमगाने मत देना !
जितना तेरा संकल्प दृढ़ होगा
उतना ही तेरा आत्मबल बढ़ेगा
और उतना ही यह संसार
प्रीतिकर हो जायेगा !
एक अलौकिक
दिव्य संगीत की धुन
तुझे सुनाई देने लगेगी जिसे सुन
तू मंत्रमुग्ध हो जायेगा !
फिर तेरे मन में यह
असमंजस और संदेह कैसा !
चल उठ देर न कर !
नव निर्माण के पथ पर
अपने कदम बढ़ा
और संसार के सारे सुख
अपनी झोली में भर ले !


साधना वैद    

  

Friday, December 13, 2013

सुखद पल









चित्र  गूगल से साभार 

साधना वैद

Tuesday, December 10, 2013

दिल्ली को ताज कैसे मिले ........



   आम आदमी पार्टी की अप्रत्याशित सफलता के लिये उन्हें हार्दिक बधाई ! परन्तु चुनाव सिर्फ हार जीत का मैच नहीं है यह प्रजातंत्र की परीक्षा और जनता के उस पर विश्वास की पुनर्स्थापना का पर्व भी है !
   दिल्ली को सरकार मिलनी ही चाहिये ! राष्ट्रपति शासन के लिये चुनाव नहीं हुए थे ! दोबारा चुनाव कराये जाने का प्रस्ताव भी समस्या का सबसे बेकार विकल्प है ! जनता ने अपनी समस्याओं से त्रस्त होकर और भ्रष्टाचार से कुद्ध होकर वर्तमान सरकार को हराया है !
   आम आदमी पार्टी के परम्परा से हट कर प्रचार और मनभावन दावों ने जनता की उम्मीदों को जिस प्रकार परवान चढ़ाया है उनको यथार्थ में लागू करने का यही सही समय है ! आम आदमी के कार्यकर्ताओं का उत्साह भी इस समय शिखर पर है और जनता के लिये कुछ असाधारण कर गुजरने का उनका हौसला भी इस समय सर्वविदित है ! यदि इस समय उन्हें कुछ कर गुजरने का अवसर मिलता है तो या तो व्यवस्था परिवर्तन का लाभ जनता को मिल कर रहेगा अथवा आम आदमी पार्टी को बदलाव की गति, वास्तविक यथार्थ और अपनी सीमाओं का भान हो जायेगा !
   आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने का अवसर मिले इसका बहुत ही सरल उपाय भी है ! बड़े भाई भाजपा को कुछ और बड़प्पन दिखाना होगा ! अपने ५ विधायकों से इस्तीफा दिला कर श्री अरविन्द केजरीवाल को बहुमत में लाना होगा जिससे वे सरकार बना कर अपने सारे वायदों को पूरा कर सकें या आवश्याक्तानुसार अपनी सोच और योजनाओं में सुधार ला सकें ! इस कदम से भारतीय जनता पार्टी का सम्मान भी बढ़ेगा और जनता के सामने उसकी छवि और उदार हो जायेगी और सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभा कर आम आदमी पार्टी के जनहित में लिये गये निर्णयों का सही आकलन करने का अवसर भी उन्हें भरपूर मिलेगा ! 

आपका क्या विचार है ? क्या यह उपाय उचित नहीं ?

साधना वैद

Monday, December 9, 2013

फिर वही ढाक के तीन पात



    चार राज्यों में चुनाव के परिणामों ने आज सच में भारत में महोत्सव का माहौल बना दिया है ! वर्षों की मायूसी, मोह भंग एवँ जद्दोजहद की ज़िंदगी जीने के बाद आज भारत की जनता के मुख पर अरसे के बाद एक सच्ची मुस्कान दिखाई दी है ! सत्ता परिवर्तन के साथ देश में राहत का वातावरण भी तैयार हो सकेगा जनता इसके लिये आशान्वित हो उठी है ! अन्याय, अराजकता, भ्रष्टाचार, मँहगाई, असुरक्षा और आतंक की चक्की में पिसते-पिसते आम जनता की मनोदशा इतनी दुर्बल हो गयी थी कि उसके लिये आस्था, विश्वास, निष्ठा, भरोसा जैसे शब्द अपना अर्थ खो चुके थे ! इतने वर्षों तक आकण्ठ भर चुका पाप का घड़ा एक दिन तो फूटना ही था ! आज के चुनाव परिणाम के साथ यह शुभ दिन भी आ गया ! आज सच में उत्सव मनाने का दिन है !
    इन चुनावों में कॉंग्रेस पार्टी की हार होगी और भारतीय जनता पार्टी की जीत होगी इसके लिये तो जनता मानसिक रूप से तैयार थी ही लेकिन अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी इतने ज़ोरदार तरीके से अपनी आमद दर्ज करायेगी यह अवश्य ही अप्रत्याशित था ! सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई एवँ शुभकामनायें !
     जिस तरह से दिल्ली में सीटों के आँकड़े सामने आये हैं उनके अनुसार दिल्ली में पुन: त्रिशंकु विधान सभा बनने के आसार दिखाई दे रहे हैं ! ३१ सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत ना मिलने के कारण सरकार बनाने के लिये ना तो भारतीय जनता पार्टी ही उत्सुक दिखाई दे रही है ना ही २८ सीटें जीतने के बाद आम आदमी पार्टी ! बदलाव होना चाहिये लेकिन इस तरह का जनादेश जनता का कोई भला नहीं कर सकता यह भी विचारणीय है ! जनता ने अपना समर्थन देकर कॉंग्रेस पार्टी को करारी हार दिलाई सिर्फ इसी आशा में कि अब साफ़ सुथरी सरकार सत्ता सम्हालेगी और आम जनता की चिंताओं और फिक्रों को विराम लग जायेगा ! लेकिन जो परिणाम सामने आये उसमें कोई भी पार्टी अकेली सरकार बनाने के लिये समर्थ नहीं ! और आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों मिल कर सरकार बनाने के लिये तैयार नहीं ! दोनों ही विपक्ष में बैठने की बात कर रहे हैं जिसका सीधा अर्थ है राष्ट्रपति शासन अर्थात परदे के पीछे से फिर कॉंग्रेस का ही शासन ! यानी कि फिर वही ढाक के तीन पात ! यदि ऐसा होता है तो जनता फिर छली जायेगी ! चुनाव खाली हार जीत का ही खेल नहीं है यह जनता द्वारा सरकार बनाये जाने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है ! चुनाव में खड़े होना का अर्थ देश के प्रति अपने समर्पण एवं त्याग को स्थापित करना है यह मात्र अहम तुष्टि का साधन नहीं है ! इन परिणामों ने फिर से चिंतित कर दिया है ! तो क्या अब भी दिल्ली के भविष्य पर अनिश्चय के बादल ही मँडराते रहेंगे ?
जनता ने चुनाव में मतदान करके अपना फ़र्ज़ अदा कर दिया ! अब फ़र्ज़ अदायगी का नंबर नेताओं का है कि वे आपसी मतभेद भूल कर अपने अपने प्रदेशों को साफ़ सुथरी, निष्ठावान एवँ कर्तव्यपरायण सरकार दें जो आम आदमी की दिक्कतों को समझे, उन्हें दूर करने के लिये प्रयासरत रहे और भ्रष्टाचार, स्वार्थ और अकर्मण्यता की पुरानी प्रचलित परम्पराओं को तोड़ कर अपनी साफ़ सुथरी छवि जनता के सामने स्थापित करे !

साधना वैद  

Friday, December 6, 2013

जीवन बदरंग


खाली बर्तन
चुक गया ईंधन 
भूखा है तन !

 कैसा  जीवन 
पिसता बचपन 
रीता है मन ! 
 
नहीं  उमंग 
जीवन बदरंग 
दुर्दशा संग ! 



साधना  वैद

Tuesday, December 3, 2013

और क्या चाहिये....


एक चित्र-गीत





चाँद और तारों भरी सुहानी रात है,
स्निग्ध शीतल चाँदनी की
अमृत भरी बरसात है,
वादी के ज़र्रे-ज़र्रे में उतरे
इस आसमानी नूर में
कुछ तो अनोखी बात है,
कारवाँ बनाने को खुद अपनी ही
परछाइयों का सुकून भरा साथ है,
तुम्हारे हाथ में मेरा हाथ है,
एक दूजे को देने के लिये
प्रेम और समर्पण की सौगात है,
जब इतना सब कुछ हो पास तो
और क्या चाहिये !

साधना वैद