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Thursday, January 16, 2020

ताशकंद यात्रा – ८ आइये चलते हैं बुखारा – १



समरकंद की रोचक, रोमांचक और उत्साहवर्धक यात्रा के बाद बुखारा देखने की ललक और बढ़ गयी थी ! बुखारा के बारे में पहले से ही बहुत कुछ सुना हुआ था कि यह अद्भुत शहर है ! इसका धार्मिक महत्त्व बहुत अधिक है ! दूर दूर के देशों में मस्जिदों के लिए इमाम यहीं के मदरसों से बुलाये जाते हैं ! हमारे यहाँ दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम सैयद अब्दुल्ला बुखारी के पूर्वज भी बुखारा से ही आये थे ! इसीलिये उनके नाम के आगे ‘बुखारी’ उपाधि लगाई जाती है ! करीमबेग के यहाँ से डिनर के बाद हम लोग सीधे रेलवे स्टेशन पहुँचे ! समरकंद से बुखारा की यह यात्रा भी हमें ट्रेन से ही करनी थी ! उज्बेकिस्तान में जनसंख्या बहुत अधिक नहीं है तो रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या हवाई अड्डा कहीं पर भी लोगों का जमघट और भीड़भाड़ नहीं होती ! हम सब लोग बहुत ही आराम से समय पर स्टेशन पहुँच गए और ट्रेन में सभी आराम से अपने स्थान पर बैठ गए ! रात का वक्त था, दिन में समरकंद के सिटी टूर के बाद सब थके भी हुए थे, अँधेरे की वजह से खिड़की के बाहर भी कुछ देखने के लिए दिलकश नज़ारा नहीं था ! खाना खाने के बाद वैसे भी नींद जल्दी आने लगती है ! इसलिए कुछ ऊँघते कुछ सोते सब विश्राम की मुद्रा में आ गए ! समरकंद से बुखारा की दूरी बहुत अधिक नहीं है ! हम लोग साढ़े दस बजे तक बुखारा पहुँच गए थे !
यहाँ भी स्टेशन के बाहर हमारे बुखारा के गाइड अपनी शानदार बस के साथ हम लोगों के स्वागत के लिए हमें स्टेशन के बाहर खड़े मिले ! मेहमान नवाज़ी में उज्बेकिस्तान के लोग बहुत ही दक्ष हैं इसमें कोई दो राय नहीं हो सकतीं ! बस में सवार हो हम लोग जल्दी ही अपने गंतव्य पर पहुँच गये ! हमारे होटल का नाम था ल्याबी हाउस !
ताशकंद और समरकंद के मुकाबले में बुखारा का वह हिस्सा, जिसमें हम ठहरे थे, कुछ पुरातन अवस्था में दिखा ! होटल पतली गली में होने की वजह से बस ने हमें काफी दूर उतारा था ! सड़कों में गड्ढे थे और शाम को ही बारिश हो जाने कारण उनमें पानी भरा था ! बिलकुल नए शहर में अपना सामान खुद ही लेकर होटल तक पहुँचना रात के उस वक्त में चुनौती भरा लग रहा था ! शायद थके हुए थे, नींद से बोझिल हो रहे थे और अनजान जगह पर वैसे भी हर मंजिल दूर ही लगती है ! अगली सुबह यही सब कुछ बिलकुल विपरीत प्रतीत हो रहा था ! सारा आलम बड़ा ही खुशनुमां और जाना पहचाना सा लग रहा था ! असली चैलेन्ज तो होटल में था झेलने के लिए ! यहाँ लिफ्ट नहीं थी ! तीन मंज़िल के इस होटल में हम लोगों के कमरे तीनों फ्लोर्स पर बुक थे ! लेकिन सबका आग्रह यही था कि ग्राउंड फ्लोर पर ही कमरा मिले ! होटल के सारे कमरे भरे हुए थे ! ग्राउंड फ्लोर पर केवल चार ही कमरे हमारे ग्रुप के नाम अलॉटेड थे ! सब बहुत थके हुए थे और बिना लिफ्ट के ऊपर चढ़ना कोई नहीं चाहता था ! रिसेप्शन काउंटर पर होटल का जो कर्मचारी बैठा था इतने शोर शराबे से घबरा कर वह चाबियाँ संतोष जी को सौंप कर अंतर्ध्यान हो गया ! हम शान्ति से अपनी चाबी का इंतज़ार कर रहे थे ! सबसे आखीर में संतोष जी के पास अंतिम चाबी जो रह गयी वह हमें मिली और वह थी तीसरे फ्लोर की ! नींद के मारे हालत खराब हो रही थी ! जैसे तैसे हिम्मत करके यह हिमालय भी हम चढ़ गए ! लेकिन ऊपर कमरे में पहुँच कर मन प्रसन्न हो गया ! खूब बड़ा कमरा था और उसका इंटीरियर देखने लायक था ! कमरे से ज़रा ही छोटा बाथरूम था ! बिलकुल साफ़ और आरामदेह ! कमरे में wi fi काम कर रहा था ! जल्दी जल्दी दिन भर के मैसेजेज़ चेक किये और बिना समय गँवाए सुबह पहनने वाले कपड़े बाहर निकाल हम फ़ौरन सोने के मूड में आ गए !
सुबह का आलम बहुत ही खूबसूरत था ! ल्याबी हाउस होटल बुखारा के जिस इलाके में है यह पूर्व में यहूदियों के रहने का मोहल्ला हुआ करता था ! एक से एक अमीर और धनवान यहूदी यहाँ अपनी बेशकीमती हवेलियों और शाही भवनों में रहा करते थे ! विश्व युद्ध के बाद में वे सब तो अमेरिका, यूरोप, कैनेडा आदि देशों में बसने के लिए चले गए लेकिन अपनी इन हवेलियों को उचित रख रखाव के साथ सजा संवार कर होटलों में तब्दील कर गए ! जिस होटल में हम ठहरे थे, ल्याबी हाउस, यह भी पूर्व में किसी बहुत धनी यहूदी का अपना रिहाइशी महल था जिसे बाद में होटल में तब्दील कर दिया गया ! हमारे यहाँ भारत में भी तो राजस्थान व अन्य अनेकों प्रदेशों में राजे महाराजों के महलों को होटल में कन्वर्ट कर दिया गया है ! घर के बीच में बड़ा सा आँगन ! आँगन में बड़े बड़े डबल बेड के साइज़ के खूबसूरत कालीनों व मसनदों से सजे तखत ! एक साइड में रिसेप्शन उसके सामने डाइनिंग हॉल एक तरफ खूब विशाल प्रवेश द्वार ! और तीसरी तरफ नीचे व ऊपर की मंजिलों में अतिथियों के ठहरने के लिए बड़े बड़े आराम देह कमरे ! तीसरी मंज़िल तक जाने के लिए सीढ़ियां लकड़ी की बनी हुई थीं ! होटल में हमारा आना जाना पीछे के छोटे द्वार से हो रहा था ! कदाचित इसलिए कि बुखारा के जिन दर्शनीय स्थलों को हमें देखना था वे वहाँ से बिलकुल पास थे !
ऊपर से नीचे का नज़ारा बहुत ही खूबसूरत लग रहा था ! जल्दी जल्दी तैयार होकर हम भी नीचे पहुँचे ! गरमागरम नाश्ता सर्व हो रहा था ! बाहर सहन में भी टेबिल चेयर्स लगी हुई थीं और अन्दर डाइनिंग हॉल में भी खाने का प्रबंध था ! बाहर भी खुशगवार वातावरण था ! अन्दर की सज्जा और दीवारों पर हुई कलात्मक कारीगरी देखने लायक थी ! हर दीवार, हर स्तम्भ, हर खिड़की, हर दरवाज़े और हर पैनल पर अद्भुत इनले वर्क हो रहा था ! हम अपनी नाश्ते की प्लेट्स लेकर अंदर ही बैठ गए ! नाश्ता इतना लज़ीज़ था कि मज़ा आ गया ! नाश्ता समाप्त कर समय का सदुपयोग मैंने तस्वीरें खींचने में किया ! होटल की हर एंगिल से तस्वीरें लीं ! पूरे वक्त इसी कल्पना में खोई हुई थी कि जो परिवार इसमें रहता होगा वह किस तरह से इस घर के हर कमरे हर साजो सामान का इस्तेमाल करता होगा ! यहाँ की क्रोकरी भी बहुत ही खूबसूरत थी !
नाश्ता समाप्त हो चुका था ! अब घूमने जाने का वक्त हो गया था ! हमारे गाइड महोदय आ चुके थे ! सब बस में बैठने के लिए उत्सुक थे ! बस कितनी दूर खड़ी है सब यह जानना चाहते थे ! जैसे ही पता चला कि आज बस से नहीं जाना है पैदल ही घूमना होगा तो निराशा की एक समवेत ध्वनि कोरस में हर गले से फूट पड़ी ! लेकिन जब घूमने के लिए ल्याबी हौज़ पहुँचे तो समझ में आ गया कि वाकई यहाँ बस का कोई काम न था ! मात्र पाँच मिनिट की दूरी पर होटल से यह स्थान था और उसके आस पास ही बुखारा के वे सभी दर्शनीय स्थल थे जिन्हें देखने के लिए हमारा ग्रुप भारत से उज्बेकिस्तान पहुँचा था !
तो क्या ख़याल है आपका ! इन स्थानों की सैर अगली कड़ी में करें तो अधिक आनंद आयेगा ना ? अभी तो आप भी हमारे साथ इस तीन मंज़िला ल्याबी हाउस होटल में ऊपर नीचे चढ़ उतर कर थक गए होंगे ! तो आनंद लीजिये इन तस्वीरों का ! मैं जल्दी ही मिलती हूँ आपसे ढेर सारी नई जानकारी के साथ अगली कड़ी में ! तब तक के लिए मुझे इजाज़त दीजिये !
फिलहाल शुभ रात्रि !


साधना वैद

4 comments :

  1. बहुत सुन्दर

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    1. हार्दिक धन्यवाद केडिया जी ! आपका आभार !

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  2. आज का यात्रा-वर्णन कुछ अधूरा सा है. अगली कड़ी का इंतज़ार रहेगा.

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    1. आप दिलचस्पी के साथ इस यात्रा वृत्तांत को पढ़ रहे हैं देख कर अच्छा लगा गोपेश जी ! बहुत विस्तृत पोस्ट पढ़ने का समय किसीके पास नहीं होता इसलिए बीच बीच में पाठकों को विश्राम देना भी आवश्यक हो जाता है ! शीघ्र ही अगली कड़ी पोस्ट करूँगी ! आपको अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी ! हृदय से धन्यवाद आपका !

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