ज्ञान की देवी
हे माँ वीणा वादिनी
साध लो सुर
बहा दो ज्ञान गंगा
कर दो मन चंगा !
मिटे अंधेरा
हो जाए आलोकित
संसार सारा
विनष्ट हो अज्ञान
दंभ औ’ अभिमान !
दिन विशेष
आया वसंतोत्सव
करते पूजा
जलाते हैं दीपक
उतारते आरती !
हे माँ शारदे
रखो वरद हस्त
मस्तक पर
शिक्षा दो संस्कार की
उच्च सदाचार की !
हम बालक
तुम जग जननी
करो कल्याण
हे माता सरस्वती
करें तुम्हें प्रणाम !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद
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