सरला के घर में आज किटी पार्टी थी! सुबह से सरला घर की साफ़ सफाई, व्यवस्था और साज-सज्जा में व्यस्त थी! किटी की 20 महिला मित्रों के बैठने की व्यवस्था, जल पान का प्रबंध और बीच में खेले जाने खेलों के विजेताओं को इनाम में दिए जाने वाले उपहारों को गिफ्ट पैक करना, सभी कुछ उसे देखना था! रविवार होने की वजह से आज सभी घर में थे लेकिन सरला की सहायता के लिए कोई भी तत्पर नहीं था! पति राजीव अपने लैप टॉप के साथ व्यस्त थे, बेटी सुकन्या अपनी सहेली के यहाँ उसका जन्मदिन मनाने चली गई थी और बेटा सुदीप वीडियो गेम खेलने में लगा हुआ था! सरला ने जब बेटे से सहायता करने को कहा तो उसने कह दिया, “आपकी किटी पार्टी है मैं कैसे करूँगा यह सब? आप देख लो न मम्मा! मुझे थोड़े ही आता है कुछ!” सुदीप अपना फोन उठा कर अपने कमरे में चला गया!
पतिदेव बिलकुल
निर्लिप्त अपने लैपटॉप में रील्स देखने में इतने तल्लीन थे जैसे घर में होने वाले
आयोजन का उन्हें कोई अनुमान ही न हो! सरला को बहुत गुस्सा आ रहा था! उसने अपने
अकेले के दम पर ही अपनी किटी पार्टी का बहुत अच्छी तरह से इंतज़ाम किया और उसकी सभी
सहेलियाँ बेहद खुश होकर गईं!
अगले सप्ताह बेटे सुदीप का जन्मदिन था! वह सुबह से बहुत खुश था! शाम को उसने
अपने दस बारह दोस्तों को बुला रखा था! लेकिन आज सुबह से किचिन में कोई हलचल दिखाई
नहीं दे रही थी! सुदीप जानता था हमेशा की तरह मम्मी बहुत अच्छी तरह से शाम की
पार्टी का सारा इंतजाम सम्हाल लेंगी! लेकिन लंच के बाद जब सरला साड़ी बदल कर अपना
शॉपिंग बैग उठा बाहर जाने लगी तो सुदीप और सुकन्या दोनों ही घबरा गए! अभी तक शाम
की पार्टी की तैयारी की शुरुआत भी नहीं हुई थी! न केक आया था, न घर में ही कोई
पार्टी स्नेक्स सरला ने बना कर या मँगवा कर रखे थे, न कमरे में ही कोई सजावट हुई
थी! सुदीप नर्वस होकर सरला के सामने जा खड़ा हुआ, “मम्मी आप
कहाँ जा रही हो? शाम को मेरे दोस्त आएँगे ना मेरा बर्थडे सेलीब्रेट करने! आप कब
तक आओगी?”
“अच्छा!” सरला हैरानी से बोली, “तुम्हारा बर्थडे है ना बेटा! मैं कैसे जानूँगी आजकल के बच्चे कैसे पार्टी सेलीब्रेट
करते हैं! तुम खुद ही देख लो न बेटा अपने दोस्तों को कैसे एन्टरटेन करना है
तुम्हें! मुझे बहुत ज़रूरी काम है ! आने में मुझे देर हो जाएगी!” और सरला रिक्शे में बैठ कर नज़रों से दूर हो चुकी थी !
चित्र - गूगल से साभार
साधना वैद

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