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Saturday, May 30, 2026

तू आस पास है - अलिवर्ण पाद छंद

 




गहरा सागर

उत्ताल तरंगें

कम्पित बदन

कूल न किनारा

घना अँधियारा

व्याकुल है मन !

 

लम्बी पगडंडी

दूर है मंज़िल

थके हुए पाँव

मुश्किल है जाना

ठौर न ठिकाना

ले चल तू गाँव !

 

विहँसती हवा

मुस्काता गगन

खिलते सुमन

कहते कान में

दिन क्यों ख़ास है

तू आसपास है !

 


चित्र - गूगल से साभार 


साधना वैद

 

 

 

 

 

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