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Thursday, October 1, 2026

टमाटर का सूप - लघुकथा

 



आज घर में बड़ी चहल पहल सी थी । पूरे घर को बड़े करीने से सजाया गया था, मेज़ पर ताज़े फूलों का गुलदस्ता था, किचिन से आती स्वादिष्ट पकवानों की सुगंध सारे घर में भरी हुई थी । शाम को ऋतु दीदी को देखने के लिए मेहरा साहेब सपरिवार आने वाले हैं । सुप्रिया उन्ही की आवभगत की तैयारियों में जुटी थी । सुप्रिया के पति ज्ञानेश बारीकी से हर व्यंजन को निरख परख रहे थे । सभी कुछ बहुत बढ़िया था । अचानक उन्हें खयाल आया कि सुप्रिया ने सूप तो बनाया ही नहीं । सुप्रिया टमाटर का सूप बहुत ही बढ़िया बनाती है । उन्होंने पूछ ही लिया

"सुप्रिया सूप बना लिया क्या ? मुझे तो चखाया ही नहीं । टमेटो सूप के साथ सूप स्टिक्स रखना मत भूलना ।"

"हाय राम सूप का तो ध्यान ही नहीं रहा मुझे । अब तो टमाटर भी दो चार ही बचे हैं ।अब क्या करें । सूप स्टिक्स भी खत्म हो गई हैं । सुनिये पंकज से कहिये ना जल्दी से बाज़ार से टमाटर और सूप स्टिक्स ला दे साथ ही कॉर्नफ्लोर का डिब्बा भी ले आए । सूप तो हाल बन जाएगा । बस सामान जल्दी से आ जाए ।" 

पंकज मम्मी पापा की बातें सुन कर चुपचाप खिसकने की योजना बना रहा था कि ज्ञानेश जी ने उसे ज़ोर से आवाज लगाई ।

"पंकज ज़रा बाजार से मम्मी को कुछ सामान लाकर दे दो जल्दी से । शाम को कुछ मेहमान आ रहे हैं डिनर पर । जल्दी जाओ । वरना देर हो जाएगी ।"

पंकज का फ्यूज उड़ गया था । बिना सूप के भी तो खाना खाया जा सकता है । क्या मुसीबत है । सब्जी मंडी में कितनी भीड़ होती है । कीचड़ गंदगी अलग से । झल्लाया हुआ वह सुप्रिया के पास पहुँचा । 

"क्या मम्मी आपको हर चीज एन वक्त पर ही क्यों याद आती है । टमाटर का सूप नहीं बनेगा तो क्या वो लोग दीदी को रिजेक्ट कर जाएंगे । वैसे भी कौन पसंद करता है टमेटो सूप आजकल । इतना बेकार का होता है ।  फ्रूटी के डिब्बे ला देता हूँ सूप की जगह वो सर्व कर देना ।"

सुप्रिया ने घूर कर पंकज को देखा । ज्ञानेश भी आ गए थे । बेचारा मन मार कर थैला उठा कर बाहर निकल गया । उसे टमाटर का सूप सख्त नापसंद था । इससे तो मम्मी कॉर्न का सूप बना लेतीं या चाइनीज सूप ऑर्डर करके मंगवा लेतीं । लेकिन पापा के आगे उसका बस कहाँ चलता है । 

मेहमानों के आने से पहले टमाटर का गाढ़ा-गाढ़ा स्वादिष्ट सूप तैयार हो गया था । मेहमान आ चुके थे और डिनर का पहला कोर्स सूप ही था । पंकज सबके साथ बैठा हुआ बेमन से किसी तरह उस सूप को गले के नीचे उतार रहा था । उसे फिक्र हो रही थी कहीं इस सूप की वजह से वे लोग ऋतु दीदी को रिजेक्ट ना कर दें । तभी मेहरा साहेब की बुलंद आवाज गूँजी । "भाभी जी आपने घर में बनाया है यह सूप ? भई वाह । मज़ा आ गया । ऋतु बिटिया को सिखाया है या नहीं आपने यह सूप बनाना । आपने तो दिल ही जीत लिया । बिटिया को अच्छी तरह प्रैक्टिस करवा दीजिएगा । शादी के बाद उसे रोज़ बनाना पड़ेगा ऐसा सूप यह तो तय है ।"

और एक सम्मिलित ठहाके से कमरा गूँज उठा । 


साधना वैद   

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