तुमसा जग में कोई
न था, न हुआ, न शायद होगा
मानवता के प्रति
तुम्हारी निष्ठा को प्रणाम
बापू तुम्हें प्रणाम !
तुम सोये तो एक संकल्प लेकर,
तुम जागे तो दृढ निश्चय के साथ
अपने उसूलों पर तुम डटे रहे
पूरी प्रतिबद्धता के साथ
देश के उत्थान के हित
तुम्हारे समर्पण को प्रणाम
बापू तुम्हें प्रणाम !
सत्य अहिंसा के तुम पुजारी थे,
दया, करुणा, प्रेम सब गुणों पर भारी थे
मानवता बसी थी तुम्हारी रग-रग में,
स्वतन्त्रता का नारा दिया था
पूरे विश्वास के साथ सम्पूर्ण जग में
तुम्हारी जिजीविषा,
तुम्हारी हठ को प्रणाम
बापू तुम्हें प्रणाम !
तुम्हारे उसूल, तुम्हारे सिद्धांत,
तुम्हारे आदर्श, तुम्हारे वृत्तांत
श्रद्धा से सुनता है सारा संसार,
मनाता है जन्मदिन तुम्हारा
इस धरा का हर देश
सातों सागर पार
तुम्हारा जीवन, तुम्हारा आचरण
आज भी जन-जन के लिए
अनुकरणीय है,
वन्दनीय है, नमनीय है !
तुम्हारे देवत्व को प्रणाम
बापू तुम्हें प्रणाम !
साधना वैद

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