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Monday, December 28, 2015

सर्दी की रात


सर्दी की रात 
ठिठका सा कोहरा 
ठिठुरा गात ! 

तान के सोया 
कोहरे की चादर 
पागल चाँद ! 

काँपे बदन 
उघड़ा तन मन 
गगन तले ! 

चाय का प्याला 
सर्दी की बिसात पे 
बौना सा प्यादा ! 

लायें कहाँ से 
धरती की शैया पे 
गर्म रजाई ! 

ठंडी हवाएं 
सिहरता बदन
बुझा अलाव ! 

चाय की प्याली 
सर्दी के दानव को 
दूर भगाए ! 

दे दे इतना 
जला हुआ अलाव 
गरम चाय ! 

आँसू की बूँदें 
तारों के नयनों से 
झरती रहीं ! 

तारों के आँसू
आँचल में सहेजे 
धरती माता ! 


साधना वैद  

Friday, August 28, 2015

राखी का धागा


शुभ मुहूर्त 
सावन की पूर्णिमा 
राखी का पर्व ! 

नेह बंधन
भावना का प्रतीक
राखी का धागा !

प्रेम का पर्व
भाल रोली अक्षत
राखी कलाई ! 

 स्नेह की डोर
भाई की कलाई पे
बाँधे बहना !

भैया दुलारे
प्यार का उपहार
राखी का धागा !

कोमल डोर
फौलाद सा बंधन
 रिश्ता अटूट ! 

राखी का स्पर्श 
चट्टान सा अटल 
भाई का मन !

धागा नहीं ये
भरोसे की जंजीर
बाँधी कलाई !

 बाँध के राखी  
आजीवन रक्षा का  
वादा दे भाई !
  
माँगे दुआएं
वारी जाये भैया पे
 प्यारी बहना !

राखी का पर्व
हर पर्व से न्यारा
अद्भुत प्यारा !

 अनूठा रिश्ता
अनुपम त्यौहार
रक्षा बंधन ! 

प्यारा बंधन 
बाँधा जो बहना ने
भाई मगन !

वारूँ तुझ पे
दुनिया की दौलत
बहना मेरी ! 

 वादा है मेरा 
 हर बुरी बला से
बचाऊँ तुझे !

आने न दूँगा
किसी भी आफत को 
पास में तेरे !

बाँधे भैया को
सुदृढ़ बंधन में 
नाज़ुक डोर !

हीरे न मोती 
न बंगला न गाड़ी 
इतना माँगूँ 
आजीवन रक्षा का 
उपहार दो भैया !


साधना वैद

Saturday, June 13, 2015

चंदा ओ चंदा


एकाकी चाँद 
छिटके से सितारे
डूबी सी रात ! 

टीले के पीछे 
मोहाविष्ट  चाँदनी 
शर्माया चाँद ! 

अँधेरी रात 
चलती रही थाम 
चाँद का हाथ !

दिखाये राह
भटके पथिक को 
दयालु चाँद ! 

व्यथित  विधु 
धरा से गले मिल 
बहाये अश्रु !

चाँद सलोना 
चुपके से आ जाए 
आधी रात में ! 

क्रोधित चंदा 
धरने पर बैठा 
अमावस्या को ! 

विधुवदनी
झील के दर्पण में 
मुख निहारे !

ओस नहीं ये 
सारी रात झरे हैं 
चाँद के आँसू ! 

अकेला चाँद 
अनगिनती तारे 
नभांगन में ! 

चंदा चाँदनी 
मेघों की ओट खेलें 
आँख मिचौली ! 

कृष्ण सलोना 
जसुदा माँ से माँगे 
चाँद खिलौना !

देवी माँ दे दो
आँचल में खेलता 
चंदा सा लाल !

चंदा ओ चंदा
क्या तेरी भी मैली है
आकाशगंगा ? 

साधना वैद