Followers

Friday, January 29, 2010

जीवन गीत ( कविता )

मंजिलें हैं दूर यह मालूम है ,
पाँव थक कर चूर, यह मालूम है ,
क्या हुआ साथी जो पीछे रह गए ,
राह अपनी खुद बनाना सीख ले |

है अमावस का घना साया पड़ा
सूर्य को भी रश्क तुझसे है बड़ा
क्या हुआ राहें अंधेरी हैं अगर
दीप अपना खुद जलाना सीख ले |

ज़िंदगी के खेल बेढब हैं बड़े ,
हसरतों पर तंज के पहरे पड़े ,
क्या हुआ जो हार है तकदीर में
हौसला अपना बढ़ाना सीख ले |

तार टूटे बीन के तो क्या हुआ ,
बोल बिखरे गीत के तो क्या हुआ ,
क्या हुआ सुर ताल लय धुन खो गए ,
गीत अपना गुनगुनाना सीख ले |

साधना वैद