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Tuesday, March 16, 2010

शक्ति रूपिणी नारी

अपने सभी पाठकों को नवसंवत्सर की शुभकामनायें देते हुए चैत्र मास की प्रतिपदा के दिन मैं उस आदि शक्ति को नमन करती हूँ जिसने इस संसार के सारे दुखों का नाश कर मानव मात्र को भयमुक्त किया है और उसको समस्त सुखों का वरदान दिया है !

‘असहाय’, ‘बेचारी’, ‘दयापात्र‘,
’अबला नारी’, ‘कमज़ोर जात’,
’दासी’,‘बाँदी’,‘गोली’,‘गुलाम’
इन सारे नामों को सलाम !

ये सब अतीत की बातें हैं ,
ये सब इतिहास के हिस्से हैं !
अब जाग चुकी नारी शक्ति
उसकी शोहरत के किस्से हैं !

उसने खुद को पहचाना है,
अपनी क्षमता को जाना है,
अपनी प्रतिभा को परखा है,
अपनी महिमा को माना है !

वह पहले सी निरुपाय नहीं,
मोहताज नहीं, असहाय नहीं,
अब आया है उसका भी वक़्त,
वह है समर्थ, वह है सशक्त !

अब ऐसा कोई काम नहीं
जो उसके दम से हो ऊँचे,
अब ऐसा कोई शिखर नहीं
जहाँ उसके कदम न हों पहुँचे !

पी.टी.ऊषा, इन्दिरा गाँधी,
लक्ष्मी बाई, भारत कोकिल,
सुष्मिता, बछेन्द्री और क़िरण
इनकी यश गाथा सुनता चल !

ये शक्ति की परिचायक हैं,
ये सब प्रतिभा की द्योतक हैं,
अनमोल निधि मानवता की,
ये नारी जाति का गौरव हैं !

क्या जग इनसे अनजाना है,
इनके यश से बेगाना है ?
तुम भी तो इनको जानो तो,
कुछ परखो तो पहचानो तो !

वह ही ‘लक्ष्मी’,वह ही ‘शक्ति’,
वह‘विद्या’,’धन’,वह‘सरस्वती,
वह ‘सिंहवाहिनी’,‘रणचण्डी’,
’दुर्गा’,‘काली’,‘माँ जगतजयी’ !

जो उसको खुश कर लेता है
वह उसके दुख हर लेती है,
अपने आँचल की छाँव तले,
वह सारा जग कर लेती है !

तुम भी माता के चरणों में,
अपनी विपदा सब हार चलो,
नत मस्तक हो पावन मन से,
तुम उसकी जय जयकार करो !
तुम उसकी जय जयकार करो !
तुम उसकी जय जयकार करो !

साधना