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Sunday, December 12, 2010

मुझे आता है

मुझे खुशियों के संदेशों
के भीतर दबी
दर्द की इबारतों को
पढ़ना और उस
दर्द में छिपी
अनकही व्यथा कथा को
गुनना आता है !

मुझे आँसुओं के गहरे
समंदर में उतर
सब्र की सीपियों से
मिथ्या मुस्कुराहट के
नकली मुक्ताओं को
चुनना और
उन्हें चुन कर
अपने लिये माला
पिरोना आता है !

स्कूल कॉलेज की
किताबों की पढ़ाई ने
चाहे कभी
सिखाया हो या नहीं
किन्तु जीवन के
अनुभवों की पढ़ाई ने
मुझे जी जी कर मरना
और मर मर कर जीना
अच्छी तरह
सिखाया है!
और शायद इसीलिये
अब मुझे
ज़िंदा लाशों और
मुर्दा इंसानों में फर्क
करना बखूबी
आ गया है !

साधना वैद