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Sunday, March 24, 2013

जी जलता है


जाने क्या बात है हर बात पे जी जलता है ,
तेरा गम दिल की इन पनाहों में ही पलता है !

तेरी यादें ही थमा जाती हैं जीने की वजह ,
वरना बेवजह भला कौन जिया करता है ! 

न कोई आस, ना उम्मीद, ना कोई वादा ,
बस एक चिराग है दिन रात जला करता है ! 

न कोई हमसफर, न दूर तक कोई मंज़िल ,
बस एक साया है जो साथ चला करता है ! 

कहो सुनाऊँ इसे कब तलक झूठे किस्से ,
सयाना हो चुका ये दिल कहाँ बहलता है !

कि गुज़रे लम्हों की हर याद नक्श है दिल पर ,
कि बीता वक्त तुझे साथ लिये चलता है !

बता दे तू ज़रा कि हम कहाँ रहें जाकर ,
क्या कोई हम सा तेरे आस-पास रहता है !

हमें तो चलते ही जाना है दौरे सहरा में ,
तेरे जहान पर नूरे खुदा बरसता है ! 

या खुदा हो चुकी है इन्तहा गुज़ारिश की ,
इन्हें क़बूलने से क्यों भला तू डरता है !


साधना वैद