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Monday, June 23, 2014

नारी


जा पहुँची है
शान से सफलता
के शिखर पे,
सामान्य नारी ही है
पूज पाओगे उसे ?

नारी पूज्य है
मंदिरों में ही बस
पाषाणी बनी, 
लड़ती है बाहर
अस्तित्व की लड़ाई !

अस्थि मज्जा से
निर्मित किया सदा 
तन तुम्हारा
   आत्मा को भी सजाया    
संस्कार की कूँची से !

साधना वैद