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Saturday, June 28, 2014

रंग - ( तांका )


बनी जोगन
धार केसरी बाना
तजा संसार   
मीरा विरक्त हुई
हुए रंग असार !

अस्त होने को
सुनहरे से लाल
हुआ सूरज
रक्तिम मुख लिये  
छिपा नीलांचल में !

सावन आया
धानी चूनर ओढ़
धरा मुस्काई
पीले गोटे के फूल
पल्लू में टाँक लाई !

सजा व्योम में 
 लाल, नारंगी, नीला
पीला सुंदर
न्यारा इन्द्रधनुष
    जगती सारी खुश !  



साधना वैद