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Saturday, July 2, 2016

आज के नेता



(१)  
भ्रष्ट आचरण का लगा, नेताजी को रोग
फल इनकी करतूत का, भुगतें बाकी लोग !
(२)
रूखी सूखी में कटे, जिनके बीते साल
सत्ता मिलते ही हुए, कैसे मालामाल !
(३)
वायुयान में जो उडें, रखें न नीचे पैर
पता चले करनी पड़े, आम रेल में सैर !
(४)
कुर्सी पाते ही चलें, ये शतरंजी चाल
घोटालों से जो बचे, पूछें जन का हाल !
(५)
नेता बनते ही हुए, तेवर बड़े अजीब
ठानी उनसे दुश्मनी, जो थे कभी करीब !
(६)
जनता से ही ऐंठ कर, बाँट रहे उपहार
नेता जी की हो रही, जग में जयजयकार !
(७)
नेताओं ने देश का, क्या कर डाला हाल
खुद भोगें सुविधा सभी, जनता है बदहाल !
(८)
माल सूत कर बढ़ गया, नेता जी का पेट
चलना भी दुश्वार है, रहते हैं लमलेट !
(९)
कौन सुने किससे कहें, मुफलिस की फ़रियाद
जंगल के इस राज में, खुदगर्ज़ी आबाद ! 
(१०)
रामराज का हो गया, सच में बंटाढार
नेता मद में चूर हैं, जनता है लाचार !

साधना वैद