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Thursday, April 20, 2017

अंतहीन सिन्धु सा तेरा अंतर माँ



अंतहीन सिन्धु सा तेरा अंतर माँ



सर्वोच्च स्थान

आदि शक्ति माता का

शाश्वत सत्य



असीम नभ

अपरिमित धरा

तेरा आलय



माँ तेरी कृपा

अथाह सागर सी

अपरम्पार



जग जननी

अगाध तेरा प्यार

सुखी संसार



दयामयी माँ

बेहद दीन पर  

करम कर



ममतामयी

अंतहीन सिन्धु सा

तेरा अंतर



अनंत शून्य

व्योम तक विस्तीर्ण

तेरी महिमा



शब्द अशेष

कैसे हो गुणगान

मैं नादान माँ



करूँ गुहार

माँ तेरी ममता का

आर न पार



कैसे समेटूँ

विपुल तेरा प्यार

गयी मैं हार



गाये संसृति

चिरंतन युग से

माँ की वन्दना



दीप जलाऊँ

आरती गाऊँ करूँ

माँ की अर्चना





साधना वैद