आज विधायक जी के घर में बड़ी चहल-पहल थी ! शहर के एकमात्र वृद्धाश्रम में उन्हें आज मदर्स डे के अवसर पर वहाँ रहने वाली निराश्रित महिलाओं को सम्मानित करने के लिए जाना था ! विधायक जी की पार्टी के लोग, शहर के सभी प्रशासनिक अधिकारी, अधीनस्थ कर्मचारी एवं पत्रकारों का अच्छा खासा जमावड़ा था ! पुष्प मालाओं की टोकरी, मिठाई के डिब्बे और नई साड़ियों के पैकेट्स गाड़ियों में रखवाए जा रहे थे ! विधायक जी की पत्नी भी बड़े सलीके से सजी हुई साथ जाने के लिए विधायक जी के पास आकर खड़ी हो गयी थीं !
सारी तैयारियों के साथ यह काफिला नियत समय पर वृद्धाश्रम पहुँच गया ! बड़े ही भव्य आयोजन में अपने घर परिवार से तिरस्कृत होने के बाद इस वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हुई सभी बुज़ुर्ग महिलाओं को विधायक जी ने सादर चरण स्पर्श कर पुष्पहार पहना कर सम्मानित किया ! विधायक जी की पत्नी ने उन्हें नई साड़ियाँ भेंट कर मिठाई के लड्डू खिलाए ! रुँधे हुए गले से विधायक जी ने जीवन में माँ की महत्ता एवं स्थान का बड़ा ही भावपूर्ण सारगर्भित भाषण दिया ! पत्रकार और फोटोग्राफर पल-पल की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद करते जा रहे थे !
“माता का स्थान तो स्वर्ग से ऊपर भी होता है ! माँ के चरणों में ही तो सारे धाम हैं ! जिसने सच्चे मन से माँ की सेवा की उसे तो जीते जी इस संसार में ही मोक्ष मिल जाता है !” भाषण लंबा था ! तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ और विधायक जी का काफिला विजयी भाव से सभा स्थल से लौट चला ! घर पहुँचते ही विधायक जी के ड्राइंग रूम में मटमैली सी पुरानी धोती में एक क्षीणकाय दुर्बल स्त्री ने प्रवेश किया, “काय लल्ला आज तो हमें भी लड़ुआ मिली हैं के नाय ? कितेक दिना से कछु मीठो नाय चखो ! कोऊ बताय रओ हतो, बो का कहत हैं बाए, हाँ आज मदर्स डे है ! जा के लाने ही तुम सबन को लड़ुआ बाँटबे को गए रहे !”
साधना वैद
No comments :
Post a Comment