तितली प्यारी
दिन भर फूलों पे
करे सवारी
उड़ती फिरे
उपवन के हर
फूल-फूल पे
चखती रहे
सुमधुर पराग
रस से भरा
संचित करे
सुकोमल पंखों में
ढेर सी ऊर्जा
अर्जित करे
कोमल हृदय में
अदम्य शक्ति
पीना है उसे
मधुर मकरंद
हर पुष्प का
पाना है उसे
रस गंध सौन्दर्य
सारे बाग़ का !
साधना वैद
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