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Wednesday, April 28, 2010

मेरी बिटिया

प्यारी बिटिया मुझको तेरा ‘मम्मा-मम्मा’ भाता है,
तेरी मीठी बातों से मेरा हर पल हर्षाता है !

दिन भर तेरी धमाचौकड़ी, दीदी से झगड़ा करना,
बात-बात पर रोना धोना, बिना बात रूठे रहना,
मेरा माथा बहुत घुमाते, गुस्सा मुझको आता है,
लेकिन तेरा रोना सुन कर मन मेरा अकुलाता है !

फिर आकर तू गले लिपट सारा गुस्सा हर लेती है,
अपने दोनों हाथों में मेरा चेहरा भर लेती है,
गालों पर पप्पी देकर तू मुझे मनाने आती है,
‘सॉरी-सॉरी’ कह कर मुझको बातों से बहलाती है !

उलटे-पुलटे बोलों में हर गाना जब तू गाती है ,
सबके मुख पर सहज हँसी की छटा बिखर सी जाती है,
तेरी चंचलता, भोलापन और निराला नटखटपन,
मेरे सुख की अतुल निधी हैं, देते हैं मुझको जीवन !

मेरी प्यारी, राजदुलारी, भोली सी गुड़िया रानी,
सारी दुनिया भर में तुझ सा नहीं दूसरा है सानी,
मेरे घर आँगन की शोभा, मेरी बगिया का तू फूल,
तेरे पथ में पुष्प बिछा कर मैं समेट लूँ सारे शूल !

मेरी नन्ही बेटी तू मेरी आँखों का नूर है,
मेरे जीवन की ज्योती, तू इस जन्नत की हूर है,
तुझ पर मेरी सारी खुशियाँ, हर दौलत कुर्बान है,
मेरी रानी बिटिया तू अपनी ‘मम्मा’ की जान है !

साधना